अगर आप किसी आपात स्थिति में फंस गए हैं तो पुलिस के भरोसे मत रहना, क्योंकि आप मदद के लिए फोन मिलाएंगे तो संपर्क नहीं हो पाएगा। शहर के 72 में से 37 थानों की लैंडलाइन खराब पड़ी है। उन पर जवाब मिलता है ‘आउट ऑफ सर्विस’, ‘लाइन बंद है’ या फिर घंटी ही नहीं उठेगी। थानों में लगे लैंडलाइन की सर्विस चेक करने के लिए रात 8 बजे से भास्कर टीम ने कॉल किया। इसमें 37 थानों में लाइन खराब होने के कारण संपर्क नहीं हो पाया। स्मार्ट सिटी और स्मार्ट पुलिसिंग की बात करने वाले जयपुर में हकीकत यह है कि पुलिस और आमजन के बीच सबसे जरूरी कड़ी संचार व्यवस्था ही कमजोर पड़ चुकी है। शहर के थानों के लैंडलाइन नंबर या तो बंद पड़े हैं या लंबे समय से बिल जमा नहीं होने के कारण आउट ऑफ सर्विस हैं। इसका सीधा असर जनता की सुरक्षा पर पड़ रहा है। लोग न स्थानीय थाने से संपर्क कर पा रहे हैं और न ही समय पर मदद मिल रही है। ईस्ट जिले में सबसे ज्यादा 12 थानों के नंबर बंद पुलिस व्यवस्था पर सवाल? … रिस्पॉन्स टाइम पर असर अगर थानों के नंबर चालू रहे तो छोटी घटनाओं की सूचना स्थानीय स्तर पर तुरंत मिल सकती है। इससे कंट्रोल रूम पर दबाव घटेगा और पुलिस का रिस्पॉन्स टाइम बेहतर होगा। फिलहाल स्थिति यह है कि सूचना पहुंचने में ही कई मिनट बर्बाद हो जाते हैं। जब थाने का फोन नहीं लगता, तो मजबूरी में लोग सीधे पुलिस कंट्रोल रूम को कॉल करते हैं। नतीजा यह कि कंट्रोल रूम की लाइनें हर वक्त व्यस्त रहती हैं। कई बार लोगों को बार-बार फोन लगाने के बाद भी संपर्क नहीं हो पाता। आपात हालात में यह देरी किसी बड़े हादसे की वजह बन सकती है। स्मार्ट पुलिसिंग के दावे किए जाते हैं, लेकिन बुनियादी सुविधा जैसे लैंडलाइन सिस्टम तक दुरुस्त नहीं है। यह स्थिति पुलिस प्रशासन की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करती है। सूत्रों के मुताबिक कई थानों के लैंडलाइन बिल महीनों से जमा नहीं हुए हैं, जबकि कई जगह तकनीकी खामियों के कारण नंबर बंद पड़े हैं।


