4 मशीनों से शुरुआत, अब 70 मशीनों पर सिलाई कर महिलाएं कमा रहीं 15 से 20 हजार महीना

तरुण चौहान | बड़वानी ठीकरी ब्लॉक में आजीविका मिशन से जुड़ी दो स्व सहायता समूह की महिलाओं ने संघर्ष और मेहनत के दम पर आत्मनिर्भरता की मिसाल कायम की है। 12 साल पहले वर्ष 2014 में इन महिलाओं ने उद्यमिता विकास प्रशिक्षण लेकर सिलाई सीखी और आठ किमी दूर एक निजी कपड़ा कंपनी में मात्र तीन हजार रुपए महीने की नौकरी की। यहीं से उन्हें खुद का व्यवसाय शुरू करने की प्रेरणा मिली। महिलाओं ने ऋण लेकर चार सिलाई मशीनों से गणेश सिलाई केंद्र की शुरुआत की। शुरुआती तीन साल बेहद चुनौतीपूर्ण रहे। न पर्याप्त काम मिलता था, न ही कमरे का किराया और बिजली बिल समय पर चुकाना संभव हो पाता था। बावजूद इसके महिलाओं ने हिम्मत नहीं हारी। पिपरी पंचायत के सरपंच ने सहयोग करते हुए केंद्र संचालन के लिए मांगलिक भवन उपलब्ध कराया। इसके बाद महिलाओं ने इंदौर, धार, पीथमपुर, खरगोन और बड़वानी के निजी कपड़ा व्यापारियों से संपर्क कर काम लेना शुरू किया। 2017 में तत्कालीन कलेक्टर तेजस्वी नायक ने अस्पताल का पुराना भवन सिलाई केंद्र संचालन के लिए उपलब्ध कराया, जिससे केंद्र को नई पहचान मिली। 2018 तक 70 मशीनों पर पहुंचा केंद्र 2018 तक गणेश सिलाई केंद्र में चार से बढ़कर 70 सिलाई मशीनें लग चुकी थीं। आज यहां काम करने वाली हर महिला 15 हजार रुपए प्रतिमाह कमा रही है। बड़े ऑर्डर मिलने पर यह आय 20 हजार रुपए तक पहुंच जाती है। केंद्र को सरकारी स्कूलों और छात्रावासों की यूनिफॉर्म, चादर, दरी, टेंट तथा निजी कपड़ा व्यवसायियों के कपड़े सिलाई के ऑर्डर मिलते हैं। जिले में आजीविका मिशन से जुड़ा यह पहला सिलाई केंद्र अब एक बड़े स्वरोजगार केंद्र के रूप में पहचान बना चुका है। बड़ा ऑर्डर मिलने पर सेंधवा, अंजड़, राजपुर, निवाली, मंडवाड़ा, बोरलाय के आजीविका सिलाई केंद्र में कपड़े कटिंग कर भेजे जाते हैं। जिससे वहां पर कार्य करने वाली 500 से अधिक महिलाओं को रोजगार मिलता है।

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