40 करोड़ का भुगतान अब तक नहीं, ठेकेदारों ने काम बंद किया

पुरानी परिषद के समय हुए निर्माण कार्यों को 40-45 करोड़ रुपए का भुगतान नगर निगम ने अब तक नहीं किया। इससे लोकल ठेकेदारों ने काम करना बंद कर दिया। इस कारण वार्डों में होने वाले छोटे मोटे निर्माण नहीं हो पाते। इधर, ठेकेदार पुराना भुगतान हो जाने के बाद ही नया काम लेने की मांग पर अड़ गए। ठेकेदारों का यह तरीका काम आया। पार्षदों को अपने वार्ड के निर्माण कार्य कराने के लिए पहले 2020-21 में हुए कार्यों का भुगतान कराने के लिए मशक्कत करना पड़ रही है। पार्षदों की एप्रोच और वार्डों के पें​डिंग निर्माण निपटाने के लिए अफसरों ने पुराना बकाया चुकाने की प्रक्रिया शुरू की। 10 करोड़ का भुगतान भी हो गया, लेकिन इसके बाद भी 40-45 करोड़ रुपए की देनदारी अब भी बची है। जो सबके लिए जी का जंजाल बन गई है। अकाउंट अधिकारी अभिलाष नागर ने बताया कि अब तो लगातार भुगतान कर रहे है। 20 प्रतिशत ने छोड़ दी ठेकेदारी बिल्डर एसोसिएशन के अध्यक्ष नीलेश अग्रवाल ने बताया कि ठेकेदारों ने अपनी रुपए खर्च कर निगम के काम निपटा दिए, लेकिन 5-6 साल बाद भी जब उन्हें निगम ने रुपए का भुगतान नहीं किया तो ठेकेदारों पर आर्थिक संकट खड़ा हो गया। 133 ठेकेदारों में से 20% ने निगम के चक्कर लगाते हुए ठेकेदारी ही छोड़ दी। पुराना भुगतान होने के बाद ही 20-25 ठेकेदारों ने नए काम में हाथ डाला है। पुराने निगम कमिश्नर ने तो भुगतान ही नहीं किया। नए कमिश्नर अभिलाष मिश्रा ने गंभीरता से भुगतान की प्र​क्रिया शुरू की है। हमारी परिषद आई तब सवा 100 करोड़ देनदारी थी ^हमारी परिषद आई तब निगम पर सवा 100 करोड़ की देनदारी थी। जो अब महज 40-45 करोड़ ही होगी। इसके भुगतान की प्रक्रिया भी चल रही है। वैसे इससे काम प्रभावित नहीं हो रहे है। जिन कामों के कई बार टेंडर निकालने के बाद भी ठेकेदार नहीं आए है, वह कुछ चुनिंदा वार्डों की समस्या है। इसके दूसरे अन्य कई कारण है। – मुकेश टटवाल, महापौर नगर निगम उज्जैन

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