जयपुर | राजधानी में संचालित करीब 40 हजार ई-रिक्शाओं का जोन वाइज बंटवारा करने में आरटीओ और ट्रैफिक पुलिस पूरी तरह फेल साबित हुई है। दोनों विभाग आठ साल बीतने के बावजूद ई-रिक्शाओं को तय जोनों में नहीं बांट सके। इन आठ वर्षों में पांच साल कांग्रेस और दो साल भाजपा का कार्यकाल रहा, लेकिन व्यवस्था जस की तस बनी हुई है। स्थिति यह है कि 6 जोन में बंटवारे की योजना के बावजूद अधिकारी अब तक केवल परकोटा क्षेत्र तक ही सीमित रह पाए हैं। आठ साल पहले ट्रैफिक कंट्रोल बोर्ड की बैठक में राजधानी में चल रहे ई-रिक्शाओं का जोन वाइज संचालन तय करने का फैसला हुआ था। इस तरह बदलती गई प्लानिंग; 9 कलर कोड में ई-रिक्शाओं के संचालन की योजना बनाई गई और कलर कोड भी फाइनल कर दिए गए। निगम को ई-रिक्शाओं के लिए स्टैंड चिह्नित करने की जिम्मेदारी दी गई। अधिकारियों ने सूची बनाकर आरटीओ को भेजी, लेकिन इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ। इसके बाद अधिकारियों ने मॉनिटरिंग का हवाला देकर ई-रिक्शाओं के बंटवारे को ट्रैफिक पुलिस जोन से जोड़ दिया। ट्रैफिक पुलिस के 6 जोन में ई-रिक्शाओं को बांटने का निर्णय लिया गया, लेकिन इस दौरान परिवहन विभाग ने पूरी जिम्मेदारी ट्रैफिक पुलिस पर डाल दी। ट्रैफिक पुलिस ने शुरुआत में परकोटा क्षेत्र में करीब 2500 ई-रिक्शाओं का बंटवारा किया, लेकिन शेष करीब 38 हजार ई-रिक्शाओं का अब तक कोई जोन तय नहीं हो सका।


