इन दिनों शादियों की सीजन चल रही है। लग्जरी कारों और हेलिकॉप्टर से बारातें पहुंच रही है। इन सबसे अलग बाड़मेर जिले के गुड़ामालानी के सगरामाणियों की ढाणी गांव से ऊंटों से बारात निकली। दूल्हा भी ऊंट पर बैठकर पहुंचे। साथ ही बाराती देवासी समाज के पारंपरिक राजस्थानी वेशभूषा पहनकर शामिल हुए। दूल्हे के पिता छोगाराम देवासी ने हमारे पूर्वज देवासी समाज की रीति-रिवाजों के अनुसार ऊंटों पर बारात लेकर जाते थे। लेकिन आधुनिक युग में यह परंपराएं धुंधली पड़ रही हैं। दरअसल, गुड़ामालानी क्षेत्र के सगरामाणियो की ढाणी में आधुनिकता के इस दौर में जहां परंपराएं धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही हैं,वहीं मुंबई में उद्यमी छोगाराम देवासी ने अपने पुत्र की शादी में राजस्थानी संस्कृति और परंपराओं को सजीव करने का एक अद्भुत प्रयास किया। समरामाणियों की ढाणी निवासी प्रकाश पुत्र छोगाराम की बारात गुरुवार रात को डूंगरवा जालोर निवासी लक्ष्मी कुमारी के घर पर पहुंची। ऊंटों पर निकली बारात करीब 40 किलोमीटर का लंबा सफर तय करके पहुंची है। शादी समारोह में पारंपरिक राजस्थानी वेशभूषा में सजी बारात जब ऊंटों पर सवार होकर निकली, तो पूरा गांव इस एतिहासिक नजारे का गवाह बना। ग्रामीणों और मेहमानों ने इस अनूठी पहल की सराहना की। लोक संगीत, पारंपरिक नृत्य और रीति-रिवाजों से सजी यह शादी देवासी समाज और राजस्थानी संस्कृति के गौरव को फिर से जीवंत करती नजर आई। संस्कृति को सहेजने की पहल दूल्हे के पिता छोगाराम देवासी ने कहा हमारे पूर्वज देवासी समाज की रीति-रिवाजों के अनुसार ऊंटों पर बारात लेकर जाते थे। लेकिन आधुनिक युग में यह परंपराएं धुंधली पड़ रही हैं। इसलिए मैंने अपने घर से इसकी शुरुआत की,ताकि हमारी नई पीढ़ी इन परंपराओं को अपनाए और राजस्थानी संस्कृति की महक बनी रहे। ग्रामीण जोगेंद्र सिंह राजपुरोहित ने कहा कि सांस्कृतिक धरोहर को बढ़ावा देने के लिए शादी सिर्फ एक पारिवारिक आयोजन नहीं थी। बल्कि देवासी समाज और राजस्थान की समृद्ध परंपराओं को आगे बढ़ाने का एक संदेश भी थी। इस पहल से आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणा मिलेगी।


