कहावत है, ‘न्याय में देरी, न्याय से वंचित करने के समान है।’ बीकानेर जिले के 48 न्यायालयों में 68264 मुकदमे पेंडिंग होने से कहावत चरितार्थ भी होती लग रही है। इनमें से 3874 तो 10 साल और 21868 मामले पांच सालों से पेंडिंग हैं। ‘भास्कर’ ने जिले के न्यायालयों में नवंबर तक पेडिंग फौजदारी और दीवानी मुकदमों की पड़ताल की। सामने आया कि दीवानी के मुकाबले फौजदारी मामले चार गुना ज्यादा पेंडिंग हैं और इनमें भी ग्रामीण न्यायालयों में संख्या अपेक्षाकृत ज्यादा है। फौजदारी के 52452 और दीवानी के 15812 मुकदमों में न्याय का इंतजार है। पहले तीन स्थान पर स्पेशल एनआई एक्ट नंबर दो कोर्ट में सबसे ज्यादा 4944 और नंबर एक में 4585 मामले चेक अनादरण के चल रहे हैं। इसके अलावा अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रीडूंगरगढ़ में 3345 मुकदमे पड़े हैं। अक्टूबर, 22 में खाजूवाला में खुली कोर्ट, तब से अधिकारी नहीं बीकानेर जिले के चार न्यायालयों में पीठासीन अधिकारी नहीं है। इनमें से अपर सत्र न्यायालय खाजूवाला को अक्टूबर, 22 में शुरू किया गया था और तब से पीठासीन अधिकारी की नियुक्ति नहीं की गई। इसका चार्ज एडीजे 6 बीकानेर के पास है। इसके अलावा सेशन जज एसीडी कोर्ट में भी अधिकारी नहीं है जिसका चार्ज वाणिज्यिक न्यायालय के पास है। सिविल एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या एक भी रिक्त है जिसका चार्ज सिविल एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या तीन के पास है। एनआई एक्ट संख्या एक में पीठासीन अधिकारी नहीं जिसका चार्ज एनआई एक्ट संख्या तीन के पास है। न्यायिक अधिकारी, कार्मिक और इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी से पेंडिंग है मामले : शर्मा बार एसोसिएशन, बीकानेर के अध्यक्ष विवेक शर्मा का कहना है कि न्यायालयों में मामलों के लंबित रहने का सबसे बड़ा कारण न्यायिक अधिकारियों और कार्मिकों की कमी है। कोर्ट खाली रहती हैं। काम करने के लिए कर्मचारी नहीं होते। इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी भी जिम्मेदार है। किराया अधिकरण की स्थापना से रेंट कंट्रोल एक्ट में जो लेंड लोर्ड टिनेंट रिलेशनशिप में फैसला होने में पीढ़िया गुजर जाती थी, अब किराया अधिकरण में नए अधिनियम से स्पेशल रेंट कंट्रोल ट्रिब्यूनल्स खुलने के बाद विवादों का निस्तारण एक-दो साल में हो जाता है। लेकिन, अपीलेंट कोर्ट में अपील किराया अधिकरण विशेष की स्थापना नहीं होने के कारण निस्तारण में समय लग जाता है। हालांकि, अब टारगेट फाइल्स के तहत मुकदमों के निस्तारण में तेजी आने लगी है। प्रीमिलिटीगेशन और लोक अदालत से मामले न्यायालयों में आने से पहले ही निपटाए जा रहे हैं।


