भास्कर न्यूज | अमृतसर रेवेन्यू विभाग की ओर से 15 जून तक रजिस्ट्री ऑनलाइन करने का प्लान तैयार किया गया है। जिसकी तैयारी 2 माह से चल रही है। इसे लेकर फाइनांस रेवेन्यू कमिश्नर (एफसीआर) ने डीसी व डीड राइटर-एडवोकेट और प्रॉपर्टी से जुड़े जानकारों संग वीडियो कांफ्रेंसिंग (वीसी) कर सुझाव मांगे। रेवेन्यू अफसरों की ओर से कहा गया कि 48 घंटे पहले पार्टियां अनसाइंड (कच्ची रजिस्ट्री) कॉपी ऑनलाइन अपलोड कर दें। सब-रजिस्ट्रार इसे चेक करेंगे और कोई त्रुटि नहीं पाई गई तो पास कर दिया जाएगा। हालांकि इस पर डीड राइटर व एडवोकेट की तरफ से आपत्ति जताई गई कि प्रॉपर्टी रजिस्ट्री से जुड़े काम को इतना लंबा लटकाने से मुश्किलें बढ़ेंगी। एडवोकेट महिंदरपाल गुप्ता ने वीसी में सवाल उठाया कि यदि किसी को वसीयत करनी हो और सेहत खराब होने पर अस्पताल में जिंदगी-मौत से जूझ रहा तो कैसे 48 घंटा वेट करेगा। किसी को पावर अटॉर्नी देकर विदेश या दूसरे राज्यों को जाना हो तो वह 2 दिन तक इंतजार करके अपना नुकसान कराना पड़ेगा। कई बार अफसरों को टेक्निकल बातों की जानकारी नहीं होती। एडवोकेट या प्रॉपर्टी जानकारों के समझाने पर दस्तावेज तस्दीक हो पाते हैं। ऐसे में कच्ची रजिस्ट्री पर ऑब्जेक्शन लगा दिया लेकिन बाद में सबकुछ ठीक निकला तो पार्टी के हैरासमेंट का जिम्मेदार कौन होगा। रजिस्ट्री की प्रकिया कैसे सरल बनाएंगे। जब कच्ची रजिस्ट्री लिखवाने के लिए लोगों को वसीका नवीस के पास आना होगा। फिर 2 दिन बाद अप्रूवल हुई या नहीं इसकी जानकारी के लिए आएंगे फिर फाइनल रजिस्ट्री के लिए। यह सिस्टम ठीक नहीं है। रेवेन्यू रिकॉर्ड में कई जगह आज तक ऑनलाइन दर्ज नहीं हो पाई हैं। रेवेन्यू रिकार्ड में फैक्टरी लिखा होता है लेकिन मौके पर ऐसा कुछ नहीं होता। प्राइवेट हाथों में रजिस्ट्री से जुड़ा काम जाने से बरसों से इस पेशे से जुड़े लोग बेरोजगार हो जाएंगे। लोग सेवा केंद्रों एडवोकेट-वसीका नवीसों के पास कहीं भी जाकर अप्वाइंटमेंट लेने के अलावा डीड लिखवा सकेंगे। इसके अलावा ऑनलाइन रजिस्ट्री की प्रक्रिया शुरू होने के बाद यह भी प्लान बनाया गया है कि दस्तावेज तस्दीक होने के 1 घंटे बाद ओरिजनल कॉपी पार्टियों को दे दी जाएगी। एडवोकेट महिंदरपाल ने बताया कि यह भी प्लान तैयार किया जा रहा कि रजिस्ट्री से जुड़े कामों के लिए कुछ वसीका नवीस सरकार रखेगी। इनको बाकायदा सैलरी भी दिया जाएगा। किसी प्राइवेट कंपनी से अटैच करके या सरकार अपने तौर पर अथवा किसी अन्य माध्यमों से होगा यह स्पष्ट नहीं किया गया है। सेवा केंद्रों में डीड लिखवाने, ई-स्टांप व अप्वाइंटमेंट लेने का काम भी होगा। बता दें कि पंजाब सरकार ने दो माह पहले मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के ई-तहसील प्रोजेक्ट की तर्ज पर जमीन-जायदाद की रजिस्ट्री की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन करने संबंधित तैयारियां शुरू की गई थी। ट्रायल के तौर पर 24 मार्च से सेवा केंद्रों के जरिए ऑनलाइन रजिस्ट्री की सुविधा शुरू करवाई जानी थी। इसके लिए सेवा केंद्र के मुलाजिमों को स्पेशल ट्रेनिंग भी दिलाई गई। लेकिन अब तक कुछ नहीं हो सका था। हालांकि अंदरखाते इसकी तैयारियां चलती रही और अब अंतिम रूप देने की तैयारी है। डीसी साक्षी साहनी ने शाम करीब 6 बजे रजिस्ट्री दफ्तरों का दौरा किया। पीडब्ल्यूडी विभाग के अफसर को निर्देश दिया कि सिटिंग प्लान व दस्तावेजों के रखरखाव को लेकर प्लान व नक्शा तैयार करके दें, ताकि रजिस्ट्री दफ्तरों में जो कमी है, उन्हें सुधारा जा सके। फिलहाल, डीसी ने डीआरओ को निर्देश दिया है कि एडवोकेट-वसीका नवीस व प्रॉपर्टी जानकारों की मीटिंग बुलाएं। जो भी अड़चनें आ रहीं उन्हें दूर कराया जाए। साथ ही सुझाव भी लें। ताकि लोगों के हित में जो हो वही फैसला लिया जाए। तहसील कॉप्लेक्स में पुराने एसडीएम दफ्तर के कोर्ट रूम में रजिस्ट्री दफ्तरों के सरकारी रिकार्ड फर्श पर पड़े मिले। जिस पर डीसी ने नाराजगी जाहिर की। अफसरों को निर्देश दिया कि इन जरूरी रिकार्ड को आलमारी में व्यवस्थित तरीके से रखवाया जाए। ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


