5वीं अनुसूची का नहीं होना आदिवासी समाज के मानवाधिकारों का उल्लंघन : तिर्की

सिटी रिपोर्टर | रांची झारखंड आर्गनाइजेशन फार ह्यूमन राइट्स जोहार ने सत्य भारती सभागार में बुधवार को जोहार अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम मनाया। कन्वीनर रतन तिर्की ने कहा कि जोहार संगठन का इतिहास काफी पुराना है। झारखंडियों के संवैधानिक अधिकारों के लिए संघर्षरत रहा है। जोहार चाइबासा और जोहार रांची ने आदिवासियों और झारखंडियों के विधिक जागरूकता अभियान में सक्रिय रूप से अहम भूमिका निभाई है। उन्होंेने कहा इस राज्य में आदिवासियों को संविधान प्रदत अधिकार पेसा कानून, वनाधिकार कानून, पांचवीं अनुसूची का नहीं होना पूरे आदिवासी समाज के मानवाधिकारों का उल्लंघन है। इस अवसर पर जोहार सदस्य प्रभाकर तिर्की, विनीत मुंडू, अंतोनी केजे, जोय बाखला, अकई झरिया मिंज, प्रीति तिर्की, अधिवक्ता सिलंवाती कुजूर, अधिवक्ता मुक्ता मरांडी, अधिवक्ता प्रेम मार्डी, अधिवक्ता पंकज कुजूर व आईकफ संत जेवियर्स कॉलेज के दर्जनों विद्यार्थी शामिल हुए।

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