बड़वानी शहर के समीप स्थित प्रदेश की जीवनदायिनी मां नर्मदा का बैकवॉटर बीते पांच माहों से खतरे के निशान से 12 से 15 मीटर ऊपर बना है। इससे कुकरा गांव और रोहिणी तीर्थ जलमग्न है। वर्षकाल के बाद से पूजन-दर्शन सहित धार्मिक आयोजन बैकवॉटर किनारे ही संपन्न हो रहे हैं। बीते दिनों से बैकवॉटर में कमी आने लगी है। लेकिन बैकवॉटर उतरने की गति काफी धीमी है। रोहिणी तीर्थ और कुकरा गांव सहित जिले के 65 गांव जलमग्न हैं। शहर के समीप राजघाट किनारे प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में लोग पूजन-दर्शन करने पहुंचते हैं। वर्षाकाल के बाद से हजारों की संख्या में परिक्रमा वासियों की आवाजाही हो रही है। हालांकि वाहनों से आने वाले परिक्रमावासियों की संख्या में अब कमी आने लगी है। लेकिन पैदल पदयात्रियों के गुजरने का सिलसिला जारी है। जिला मुख्यालय के पास राजघाट के पूर्व सड़क की दोनों रपट अब तक जलमग्न हैं। ऐसे में पुराने फिल्टर प्लांट के पास बैकवॉटर किनारे ही पूजन-दर्शन, स्नान और आयोजन हो रहे हैं। रबी सीजन में नहरों में पानी छोड़ा जा रहा है। लेकिन इससे नर्मदा बैकवॉटर में खास गिरावट नहीं आई है। राजघाट किनारे बना प्राचीन दत्त मंदिर जलमग्न होकर शिखर का कुछ हिस्सा अभी नजर आ रहा है। बता दें कि राजघाट में खतरे का निशान 123.280 मीटर है। लेकिन अभी बैकवॉटर का लेवल 135 मीटर के करीब है। जबकि बांध पूर्ण भरने पर बैकवॉटर का उच्च लेवल 138.60 मीटर तक रहता है।


