जल जीवन मिशन में 19313 नलकूप खनन होने हैं। इसके लिए 243.84 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। एक बोर पर सरकार 1.25 से 1.50 लाख रुपए देती है। अब तक 13651 बोर किए जा चुके हैं। इसमें से 3755 बोर सूखे निकल गए हैं। इस तरह करीब 56 करोड़ रुपए बिना पानी मिले ही सरकार के खर्च हो गए। जब इन सूखे बोर के नीचे का खेल समझने के लिए परत दर परत 15 दिन तक इन्वेस्टिेशन किया गया तो एक बड़ा सच सामने आया। हर खनन के पहले हाइड्रोलॉजिस्ट से जांच करवानी होती है। यह देखना होता है कि पानी है या नहीं। रेसिस्टिविटी सर्वे में अगर पानी की संभावना मिले तब भी खनन शुरू करना होता है। विभाग ने भी नियम बना रखा है कि जब 90 से 120 मीटर की रेसिस्टिविटी सर्वे रिपोर्ट मिले तभी बिल पास होगा। लेकिन यह रिपोर्ट घर बैठे महज 1500 रुपए तैयार होकर मिल जा रही है। इस वजह से 50 मीटर पर पानी न मिलने वाले बोर भी 120 मीटर की खुदाई दिखाकर विभाग से पैसे वसूल ले रहे हैं। यह तब सामने आया जब दैनिक भास्कर रिपोर्टर ने एक ठेकेदार बनकर तीन हाईड्रोलॉजिस्ट से बात की और एक फर्जी सर्वे रिपोर्ट तैयार करवाई। रिपोर्ट भी बिना मौके पर गए ही बनकर मिल गई। यही नहीं तारीख का कॉलम खाली छोड़ दिया गया कि अपने हिसाब जो मन करे डाल लीजिएगा। हाइड्रोलॉजिस्ट बोला- तारीख अपने हिसाब से डाल लेना इंद्रावती के पीएचई ऑफिस पहुंचा भास्कर तो प्रमुख अभियंता के पीए ने नरेंद्र जैन हाइड्रोलॉजिस्ट का नंबर दिया, उनसे बात की आपका नंबर पीएचई से मिला है। हमारी कंपनी बेमेतरा में जल जीवन मिशन का काम कर रही है। हमारा 2023-24 का एक पैमेंट फंस गया है। हमने बोर कराया है लेकिन वह सूखा निकल गया है। अब बिल लगाने पर विभाग कह रहा है कि सर्वे रिपोर्ट लगवानी पड़ेगी। हमने उस समय सर्वे करवाया नहीं था। रिपोर्ट मिल पाएगी क्या। इस पर जैन ने कहा कि कल आप कॉल करना, मैं रिपोर्ट बनवा दूंगा। अगले दिन काल करने पर उन्होंने सावन बिसेन का नंबर दिया और कहा कि इनसे बात कर लीजिए। आपको रिपोर्ट मिल जाएगी। बिसेन से बात करने पर उन्होंने तुलेश्वर राम साहू का नंबर दिया। तुलेश्वर ने हाथोंहाथ बना दी रिपोर्ट आपका नंबर सावन बिसेन ने दिया है। जल जीवन मिशन में एक काम किया है, लेकिन बोर सूखा निकल गया। बिल के लिए सर्वे रिपोर्ट मांगा जा रहा है।
-आप मुझे डीएल नंबर और गांव का नाम भेज दीजिए। मैं आपको डिजिटल रिपोर्ट बनाकर दे दूंगा। उसे कलर प्रिंट आउट लगाकर बिल में लगा दीजिएगा, पास हो जाएगा। ड्रिल करवा लिए हैं क्या? तीन साल पहले ही। 2022-23 के काम में मिला था। बिना सर्वे के ही बोर करवा लिया तो वह सूखा निकल गया। अब विभाग में बिल पास करने के लिए रिपोर्ट मांग रहे हैं।
-ठीक है, मैं रिपोर्ट और क्यू आर कोड भेज देता हूं। आप डिटेल मैसेज कर दीजिए
( शुक्ला इंटरप्राइजेज, ग्राम-कोबिया, जिला बेमेतरा मैसेज करने के कुछ घंटे बाद ही रजेसिटिविटी सर्वे रिपोर्ट आ गई। तुलेश्वर ने फोन किया)
-मैंने रिपोर्ट भेजी है, देख लें। हां, वो ठीक है। पैमेंट कितना भेजना है। स्लिप देंगे क्या?
-1500 रुपए भेज दीजिए। रिपोर्ट ही स्लिप होती है। सूखे बोर के बिल में यही रिपोर्ट लगती है न?
-रजेसिटिविटी सर्वे के बाद बोर होता है। इसलिए मैंने डेट छोड़ दिया है, आप अपने हिसाब से डाल लीजिएगा। बोर के बिलिंग डेट से दो-तीन दिन पहले डाल देना। कोई पूछे तो यह बता देना कि बोर किया लेकिन पानी नहीं आया। आपने 120 मीटर की रिपोर्ट दी है, क्योंकि बिल तभी पास होगा?
– मैंने बढ़ाकर 135 मीटर कर दिया है। इसका मतलब यह है कि 120 मीटर से अधिक खुदाई किया लेकिन पानी नहीं आया। आंकड़ों से समझें (यह आंकड़े जुलाई 2025 तक के हैं ) मंत्री के जिले में नहीं मिला सूखा बोर
प्रदेश के 33 में से 31 जिलों में सूखे बोर मिले हैं। सिर्फ लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री अरुण साव के जिले मुंगेली और मंत्री केदार कश्यप के जिले नारायणपुर में एक भी बोर सूखा नहीं मिला। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के जिले राजनांदगांव में भी सिर्फ 8 सूखे बोर मिले। खेल को ऐसे समझें पहले जांच होगी, फिर करेंगे पेमेंट
सूख बोर की जांच की जाएगी। ठेकेदारों ने जो रजेसिटिविटी सर्वे रिपोर्ट लगाई है, अब उसका भी सत्यापन करवाएंगे। उसके बाद ही बिल पास होगा। अगर कोई गड़बड़ी पाई जाती है तो कार्रवाई की जाएगी। -जितेंद्र शुक्ला, एमडी, जल जीवन मिशन


