5 से 10 साल पहले कृषि जमीन का डायवर्सन कराया पर नहीं दे रहे थे टैक्स, करीब 42 हजार की सूची तैयार

खाली प्लॉट पर कब और कितना टैक्स लिया जाएगा, इसको लेकर विवाद पूरी तरह से खत्म हो गया है। शहर के अब उन सभी लोगों को टैक्स देना होगा जिनके पास डायवर्सन वाली खाली जमीन है। यानी जिन्होंने कृषि जमीन खरीदी थी और बाद में उसे आवासीय जमीन बना लिया। यह भी तय हो गया है कि ऐसे सभी लोगों को डायवर्सन कराने की तारीख से ही टैक्स देना होगा। जमीन की रजिस्ट्री कब कराई गई इससे निगम को कोई मतलब नहीं रहेगा। निगम ने ऐसे करीब 42 हजार लोगों की सूची तैयार कर ली है। इनमें 5-10 साल पहले डायवर्सन कराने वाले लोग भी शामिल हैं। निगम में फिलहाल इनके बकाया टैक्स का रिकार्ड तैयार किया जा रहा है। सभी लोगों को इसी महीने से डिमांड नोट यानी नोटिस भेजा जाएगा। डिमांड नोट मिलने के बाद भी संपत्ति कर अदा नहीं करने वालों से जुर्माना वसूला जाएगा। निगम अफसरों का कहना है कि कई लोग तो ऐसे हैं जिन्होंने डायवर्टेड प्लाट खरीदा है लेकिन उन्हें भी इसकी जानकारी नहीं है। ऐसे लोगों के लिए निर्देश जारी किया गया है वे खुद संबंधित जोन में जाकर इसकी जानकारी दें। उनके प्लॉट की इंट्री निगम रिकार्ड में होने के साथ ही ऑनलाइन आईडी भी बना दी जाएगी। इसका फायदा बाद में इसी जमीन पर नक्शा पास कराते समय भी मिलेगा। निगम की ऑनलाइन आईडी होने की वजह से उनकी जमीन में किसी भी तरह का फर्जीवाड़ा नहीं हो पाएगा। निगम का टैक्स बढ़ेगा, इस बार 300 करोड़ तक भी नहीं पहुंचे खाली प्लॉट से भी टैक्स लेने पर निगम का राजस्व बढ़ेगा। वित्तीय साल 2024-25 में संपत्ति कर की वसूली 300 करोड़ भी नहीं हो पाई थी। इस वजह से फैसला लिया गया कि 2025-26 में खाली प्लॉट से भी टैक्स लिया जाएगा। निगम अफसरों के अनुसार 3.25 लाख से ज्यादा प्रॉपर्टी शहर में होने के बावजूद 70 हजार से ज्यादा लोगों ने निगम को टैक्स ही नहीं दिया। इस वजह से भी संपत्ति कर की वसूली कम हुई। राजस्व और तहसील से भी मांगा जा रहा रिकार्ड शहर में अभी भी कहां-कहां खाली प्लॉट है और कितने लोगों ने डायवर्सन कराया, इसकी जानकारी के लिए राजस्व विभाग से भी मदद ली जा रही है। रायपुर एसडीएम से भी कहा गया है कि वे तहसील से रिकार्ड उपलब्ध करवाएं कि किन लोगों ने हाल-फिलहाल में या ऑनलाइन रिकार्ड होने से पहले जमीन खरीदकर उसका लैंडयूज चेंज कराया है। ऐसी तैयारी इसलिए की जा रही ताकि हर हाल में सभी डायवर्टेड प्लॉट का टैक्स लोगों को लिया जा सके। अफसरों की माने तो ओपन प्लॉट से टैक्स वसूली में निगम को करीब 50 करोड़ का अतिरिक्त राजस्व मिलेगा। जिनके पास कृषि भूमि है उनसे कोई टैक्स नहीं लिया जाएगा। लेकिन निगम सीमा क्षेत्र में कृषि जमीन में दो कमरे का मकान, हॉल-गोदाम या कमर्शियल वाहनों की पार्किंग बनाई गई है तो ऐसे मालिकों को भी टैक्स देना होगा। कृषि जमीन पर खेती की जा रही है तो उससे टैक्स नहीं लिया जाएगा। कांग्रेस सरकार ने दो साल का टैक्स लेने का प्लान बनाया था पिछली कांग्रेस सरकार ने 2023 में योजना बनाई थी कि शहरी सीमा में जिन लोगों के पास खाली प्लॉट है उन्हें भी संपत्ति कर देना होगा। इस घोषणा का विरोध शुरू होने पर निगम के राजस्व विभाग ने तय किया था कि लोगों से केवल 2 साल का टैक्स लिया जाएगा। चाहे उन्होंने जमीन कभी भी खरीदी हो। इस योजना को मंजूरी देने के लिए प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया था। लेकिन सरकार ने इस पर कोई फैसला नहीं लिया। इसके बाद सरकार बदल गई। निगम में भी कांग्रेस की जगह भाजपा की सरकार बन गई। इसलिए अब राज्य और निगम सरकार की सहमति पर नया नियम बनाया गया है। अफसरों को दावा है कि नए नियम से लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।

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