भास्कर न्यूज | जशपुरनगर अब आदिवासी समुदाय की आवाज़ भी डिजिटल माध्यमों से दुनिया तक पहुंचेगी। हाल ही में “आदिवासी लाइव्स मैटर”द्वारा एक विशेष चार-दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें छत्तीसगढ़, झारखंड और आंध्र प्रदेश से आए 50 से अधिक आदिवासी युवाओं ने हिस्सा लिया। यह कार्यक्रम 22 से 25 अगस्त के बीच कुनकुरी ब्लॉक के गिनाबाहर गांव में संपन्न हुआ। इसका उद्देश्य था कि युवा अपने समुदाय की कहानियों, संस्कृति और संघर्षों को डिजिटल स्टोरीटेलिंग के ज़रिये व्यापक स्तर पर प्रस्तुत कर सकें। इस प्रशिक्षण में युवाओं को डिजिटल मीडिया की बुनियादी और उन्नत तकनीकों की जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि प्रभावी लेखन और कहानी कहने की कला किस तरह एक सामान्य विषय को भी दर्शकों के लिए रोचक बना सकती है। प्रतिभागियों को कहानी कहने के विभिन्न प्रारूपों से परिचित कराया गया, जिसमें यह समझाया गया कि किस प्रकार एक भावनात्मक, सूचनात्मक और सशक्त संदेश देने वाली कहानी रची जा सकती है। इसके अलावा फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी के माध्यम से अपनी संस्कृति और परंपराओं को चित्रों और वीडियो में प्रस्तुत करने की तकनीकी बारीकियां भी सिखाई गईं। युवाओं को कैमरा संचालन, फ्रेमिंग, लाइटिंग, और संपादन की मूल बातें समझाई गईं, ताकि वे खुद अपने गांव की कहानियों को बेहतर तरीके से रिकॉर्ड और प्रस्तुत कर सकें। प्रशिक्षण का सबसे महत्वपूर्ण भाग रमसमा गांव का दौरा रहा, जहां स्थानीय ग्रामीणों से मुलाकात कर उनकी पारंपरिक जीवनशैली, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक मूल्यों के बारे में सीधी जानकारी प्राप्त की। यह एक अनुभवात्मक सत्र था जिसमें सभी प्रतिभागियों को पांच समूहों में बांटा गया और हर समूह को एक शॉर्ट फिल्म बनाने का कार्य सौंपा गया। प्रत्येक समूह ने तीन मिनट की डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाई, जो उस गांव की परंपराओं और कहानियों पर आधारित थी। शाम को इन फिल्मों की स्क्रीनिंग की गई, जिसमें सभी प्रतिभागियों ने एक-दूसरे की प्रस्तुतियों को देखा और सीखा कि किस तरह एक ही विषय को विभिन्न दृष्टिकोणों से प्रस्तुत किया जा सकता है। प्रशिक्षण में सोशल मीडिया कंटेंट निर्माण का भी विशेष सत्र आयोजित किया गया, जहां युवाओं को यह बताया गया कि कैसे वे फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब जैसे प्लेटफार्मों पर अपनी बात को प्रभावी ढंग से रख सकते हैं और एक मज़बूत डिजिटल पहचान बना सकते हैं। उन्हें यह भी सिखाया गया कि डिजिटल स्पेस में सकारात्मक और संवेदनशील संवाद कैसे किया जाता है। इस पूरे प्रशिक्षण कार्यक्रम का नेतृत्व डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर दीपक बड़ा, अधिवक्ता राकेश रोशन किड़ो और ALM के प्रोजेक्ट मैनेजर नितेश महतो सहित कई अनुभवी विशेषज्ञों ने किया।


