डिंडौरी जिले के सरकारी और प्राइवेट गोदामों में राइस मिलर्स की बड़ी मनमानी सामने आई है। वर्ष 2023-24 के दौरान मिलर्स ने करीब 5800 मीट्रिक टन अमानक (घटिया) चावल जमा करा दिया था। विभाग द्वारा सात बार नोटिस देने के बाद भी मिलर्स इसे बदलने या सुधारने के लिए तैयार नहीं हैं। अब कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने मध्य प्रदेश सिविल सप्लाई कॉर्पोरेशन के भोपाल स्थित महाप्रबंधक को पत्र लिखकर मिलर्स पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। सात बार दिया नोटिस जानकारी के अनुसार, खनूजा, लक्ष्मी अग्रवाल, मां नर्मदा और मेकल सुता जैसे बड़े गोदामों में रखा चावल जांच में फेल पाया गया था। विभाग ने मिलर्स को अपने खर्चे पर इस चावल को बदलने के लिए 21 नवंबर 2025 को बैठक कर सख्त निर्देश दिए थे। इसके बावजूद भारत राइस मिल, बजरंग राइस मिल, वाहे गुरु और मां नर्मदा राइस मिल जैसे संस्थानों ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। मिलिंग नीति के अनुसार, खराब चावल पाए जाने पर मिलिंग राशि का 4 गुना जुर्माना और मिल को 3 साल के लिए ब्लैकलिस्ट करने का नियम है। गोदामों में सड़ गया गरीबों का राशन वहीं जिले के गोदामों में रखा राशन भी सड़ रहा है। निगावानी गोदाम में जांच के दौरान लगभग 1600 क्विंटल गेहूं खराब मिला। साल 2018-19 की मसूर और कोरोना काल के समय गरीबों के लिए आया चना और दालें भी खराब हो गई। विभाग ने बताया कि उन्होंने इस बर्बादी की जानकारी भोपाल के बड़े अधिकारियों को कई बार दी है। विधायक बोले- दोषियों पर सख्त कार्रवाई करें इस पूरे मामले पर भाजपा विधायक ओमप्रकाश धुर्वे ने कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब मिलर्स ने खराब चावल भेजा, तब क्वालिटी चेक करने वाले अधिकारी क्या कर रहे थे। विधायक ने कहा कि पत्र लिखने मात्र से काम नहीं चलेगा, अधिकारियों ने जानबूझकर राशन की कमी पैदा की है। उन्होंने इस मामले में कलेक्टर से बात कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई कराने की बात कही है। भोपाल टीम के निरीक्षण में मिली गड़बड़ी मामले के प्रभारी अधिकारी और डिप्टी कलेक्टर वैद्यनाथ वासनिक ने बताया कि भोपाल की टीम के निरीक्षण में यह गड़बड़ी मिली थी। सात बार नोटिस देने के बाद केवल दो मिलर्स चावल सुधारने के लिए तैयार हुए हैं। बाकी मिलर्स की जानकारी और उन पर कार्रवाई के लिए भोपाल मुख्यालय को रिपोर्ट भेज दी गई है।


