भास्कर न्यूज | अमृतसर ट्रैफिक पुलिस की ओर से ई-रिक्शा व ऑटो चालकों को वर्दी पहनने के साथ-साथ नेम प्लेट और आईडी लगाने के दिए गए निर्देशों का अभी तक कोई पालन नहीं हुआ है। शहर में नाममात्र ई-रिक्शा व ऑटो चालकों न वर्दी पहनी है। यह आदेश करीब एक महीने पहले एडीसीपी ट्रैफिक हरपाल सिंह की ओर से दिया गया था, लेकिन जैसे ही उनका तबादला हुआ तो यह आदेश भी शायद दबकर ही रह गया। उनकी जगह पर पीपीएस अधिकारी अमनदीप कौर को एडीसीपी ट्रैफिक लगाया गया था। हालांकि वह पहले भी शहर में इस विभाग में रह चुकी है और उनके रहते ट्रैफिक कंट्रोल भी हुआ था। अब भी वह शहर की ट्रैफिक को कंट्रोल करती हुई सड़क पर अक्सर दिख जाती है, लेकिन ई-रिक्शा व अॉटो चालकों को वर्दी पहनाने के निर्देश को वह लागू नहीं करवा सकी है। जल्द ही वह यूनियनों के नुमाइंदों के साथ बैठक करेंगी। बता दे कि मार्च 2025 में शहर के तत्कालीन एडीसीपी ट्रैफिक हरपाल सिंह ने ई-रिक्शा व ऑटो चालकों को वर्दी पहनने के साथ-साथ नेम प्लेट और आईडी लगाने के निर्देश दिए थे। इस आदेश के बाद कुछेक चालकों ने इन आदेशों का पालन भी किया, लेकिन कुछ दिनों के बाद ही उनका तबादला हो गया तो चालक भी उनके इन आदेशों को भूल गए। नतीजतन अभी तक 5 % चालक ही वर्दी पहन सके है। 6 अप्रैल तक ई-रिक्शा व ऑटो चालकों को वर्दियां आदि पहनने के निर्देश दिए गए थे। पंजाब पुलिस ने ई-रिक्शा और ऑटो चालकों को वर्दियां पहनाने, नेम प्लेट लगाने और आईडी लगाने के निर्देश इसलिए दिए थे कि ई-रिक्शा व ऑटो में बैठने वाले लोगों के साथ वारदातें काफी बढ़ गई थीं। इसकी कई शिकायतें भी पुलिस के पास पहुंच रही थीं, जिसके चलते यह फैसला किया गया था। वर्ष 2023 के अंतिम 3 महीने में ई-रिक्शा चालकों ने सैलानियों से कई लूट की वारदातों को अंजाम दिया था। यह घटना फरवरी 2024 तक बढ़ गई, जिसके बाद दैनिक भास्कर ने प्रमुखता से लूट की वारदातों का जिक्र कर उस वक्त रहे ट्रांसपोर्ट मंत्री लालजीत भुल्लर से बात करके खबर लगाते हुए उनके सामने क्राइम को लाया गया, जिसके बाद मंत्री ने पुलिस कमिश्नर से मीटिंग कर ई-रिक्शा पर यूनिक टैग नंबर लगाने को लेकर मीटिंग हुई। पुलिस 20 हजार से अधिक ऑटो और ई-रिक्शों पर यूनिक टैग नंबर लगा चुकी हैं। लेकिन वर्ष 2025 में ई-रिक्शा चालकों की ओर से दोबारा लूट की घटनाएं होनी शुरू हो गईं। इस चार महीने में 5 लूट की वारदातें हो चुकी हैं। हालांकि पुलिस ने आरोपी काबू भी किए हैं। वहीं दो साल की बात करें तो कुल 21 मामले सामने आए हैं।


