भास्कर न्यूज | जशपुरनगर-सोगड़ा सोगड़ा गांव का अघोर आश्रम पिछले दो दशक से पर्यावरण संरक्षण, वनों की रक्षा और जैव विविधता की बहाली के लिए काम कर रहा है। आश्रम की ओर से चलाए गए वन संरक्षण अभियान के चलते सोगड़ा, खरवाटोली, टेम्पू, केसरा, मरगा, चड़िया, पोड़ीपटकोना जैसे गांवों में लगभग 6 हजार हेक्टेयर जंगल को बचाया गया है। भैरव पहाड़ एक समय नष्ट होने की कगार पर था। आश्रम, वन विभाग और स्थानीय लोगों के सहयोग से इस क्षेत्र में फिर से हरियाली लौटी है। 2026 में फेंसिंग और नए पौधे लगाकर 8 हजार एकड़ में जंगल सुरक्षित करेंगे। इसके लिए राज्य सरकार वन विभाग के जरिए इलाके में फेंसिंग कराकर जंगल को सुरक्षित करेगा। जंगल में मुख्यत: साल के पेड़ हैं। इसके अलावा बेल, तुलसी, नीम, अश्वगंधा, हल्दी, अदरक, एलोवेरा, आंवला, गिलोय, ब्राह्मी, शतावरी, चिरायता, सदाबहार, सहिजन, करीपत्ता, महुआ, अर्जुन, अड़ूसा, हड़जोड़, अड़हुल ,पीपल, पिपली, कंटकारी, जामुन, इमली, हर्रा, सिंदूर, चरायगोडवा, बैर, बांस, पुनर्नवा, सेमल,पलाश, मालकांगनी, दालचीनी, डोरी व कटहल के पौधे लगाए गए हैं। जशपुर नगर में 12 हजार से अधिक पौधे बांटे गए नौ साल पहले आश्रम ने हर घर में फलदार पेड़ लगाने का अभियान चलाया। जशपुर नगर में 12 हजार से अधिक पौधे बांटे गए। शहर में आश्रम के अनुयायी गांव-गांव जाकर लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करते हैं। आग से होने वाले नुकसान को समझाते हैं और खुद जंगल जाकर आग बुझाने का काम करते हैं। पर्यावरणीय पहल के अंतर्गत आश्रम ने 2010 में एक और अनूठा कदम उठाया। 25 एकड़ बंजर भूमि में चाय बागान लगाया गया। मानस सिंह बताते हैं कि यहां से निकली चाय की गुणवत्ता बेहतरीन है।


