मेडिकल कॉलेज कोटा में ईएनटी विभाग में एक 6 साल के बच्चे का ऑपरेशन कर उसके फेफड़े से सेल (घड़ी में लगने वाला) निकाला है। ये सेल बच्चे की श्वास नली में फंसा हुआ था। जिस कारण बच्चे को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी।ईएनटी विभाग के एचओडी डॉ. शिव कुमार की अगुवाई में डॉ. कुलदीप राणा, डॉ. शुभम व एनेस्थीसिया टीम से डॉक्टर देव राज ने आज सुबह बच्चे का सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया। डॉ. शिव कुमार ने बताया कि गुरूवार शाम को एमपी के श्योपुर निवासी सावन (6) को परिजन एमबीएस हॉस्पिटल लाए। उसका एक्सरे व सीटी स्केन करवाई तो फेफड़े में राइट साइड पर घड़ी का सेल फंसा होने का पता लगा। सभी जरूरी जांचों के बाद आज सुबह बच्चे का ऑपरेशन किया गया। मुंह से दूरबीन की मदद से श्वास नली से सेल को बाहर निकाला। परिजनों ने बताया कि तीन दिन पहले खेलते समय सावन ने घड़ी का सेल मुंह में ले लिया था। जो श्वास नली में चला गया।फेफड़े के राइट साइड में जाकर फंस गया। बच्चे को खांसी होने लगी। सांस लेने में दिक्कत होने लगी। उसे डॉक्टर के पास ले गए। डॉक्टर ने हायर सेंटर पर इलाज कराने की सलाह दी। जिसके बाद उसे कोटा लेकर आए। बेहोश कर सेल को निकाला
डॉ. शिव कुमार ने बताया कि किसी भी इंसान को ज्यादा देर सांस बंद करके नहीं रख सकते। इस प्रक्रिया में बच्चों को बेहोश किया फिर दूरबीन डालकर सेल को बाहर निकाला। इस प्रोसेस में डेढ़ से दो मिनट का वक्त लगा। इसमें खतरा दो तरीके हो सकता है। एक तो श्वास की नली में फंसने से सांस बंद हो सकती है। बच्चों के केस में एक तरफ जाकर सेल फंसा था। बच्चा दूसरी नली से सांस ले रहा था। दूसरा जैसे ही सेल किसी पानी के कांटेक्ट में आता है। उसमें से केमिकल निकलने लग जाते हैं। वह केमिकल फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकते थे। अगर वो खाने की नली में फंस जाए तो नुकसान कर सकता है। सेल से निकलने वाला टॉक्सिन शरीर में फैलने से जहर भी फैल सकता है। इसको तुरंत निकालना जरूरी होता है।
खाने की नली में सेल फंसने के काफी मामले आए हैं। सांस की नली में सेल फसने का मामला पहली बार सामने आया है।जिसको बाहर निकाला है।


