जिला-सिविल अस्पताल के साथ सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में पैथोलॉजी सेवाएं दे रही निजी कंपनी साइंस हाउस ने 3 साल 11 महीने में 12 करोड़, 84 लाख 32 हजार 216 लोगों की जांचें कर दीं। इसकी एवज में स्वास्थ्य विभाग ने कंपनी को 943 करोड़ का भुगतान कर दिया। विधानसभा में कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह के सवाल पर विभाग ने 68 हजार पन्नों में जवाब सौंपा है। इसमें ये चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। जानकारी के अनुसार आयकर छापों के दौरान सुर्खियों में आई यह कंपनी साइंस हाउस दो नामों से संचालित हो रही है। पीओसीटी साइंस हाउस प्रा.लि. (वेटलीज रियेजेंट रेंटल) और साइंस हाउस प्रा.लि. (हब एंड स्पोक)। दस्तावेजों की पड़ताल में पता चला कि कंपनी ने आउटसोर्स के जरिए जो सेवाएं दी, उसके अलग-अलग रेट लगाए और सरकार से भुगतान लिया। यह भी कहा गया कि कंपनी ने सामान्य रेट से 25% ज्यादा पैसा वसूला। यह भी सामने आया कि दोनों फर्मों ने विभाग को भेजे बिल में एसजीएसटी और सीजीएसटी 9-9% ले लिया। जबकि लैब द्वारा की जाने वाली जांचों ब्लड टेस्ट, यूरीन जांच, एक्सरे, एमआरआई, सीटी स्केन और अन्य जांचों को हैल्थ केयर सर्विसेज की श्रेणी में रखा गया, जिसे जीएसटी से छूट है। इसी तरह हर जांच का पच्चीस प्रतिशत ज्यादा पैसा लिया गया जो एनएबीएल सर्टिफाइड रेट से ज्यादा है। यह सवाल भी आया कि टेंडर के अनुसार कंपनी के 5 साल पूरे हो रहे हैं, इस जानकारी के बाद भी नए टेंडर करने की बजाय कंपनी को ही एक साल का एक्सटेंशन दे दिया गया। मरीजों की गैर जरूरी जांचें कीं और बढ़ाया बिल, रेट भी ज्यादा लगाए ऐसे बढ़ाया बिल कंपनी ने जांचों की एक चैकलिस्ट छपवाई। डॉक्टर ने मरीज की 3-4जांचें लिखी, पर कंपनी ने इससे ज्यादा जांच कर बिल बढ़ा लिया। हर जांच के सामने एक चैक बॉक्स था, जिसमें ‘सही’ का चिह्न लगा दिया जाता था। छूट, फिर भी GST लैब ने ब्लड व यूरीन टेस्ट, एक्सरे, एमआरआई, सीटी स्केन और अन्य जांच हेल्थ केयर सर्विसेज में रखी। इन्हें जीएसटी से छूट है, पर कंपनी ने 9% SGST और इतना ही CGST वसूला। पांच साल में यह 100 करोड़ से ज्यादा है। 25% ज्यादा रेट आउटसोर्स में 2020 से पैथोलॉजी चला रही कंपनी पीओसीटी साइंस हाउस को ही पांच साल बाद एक साल का एक्सटेंशन दे दिया गया। इसी तरह लैब एनएबीएल सर्टिफाइड नहीं थी और हर जांच का पच्चीस प्रतिशत ज्यादा पैसा लिया। एक ही जांच के जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में अलग रेट ईओडब्ल्यू… जांच एजेंसियों ने भी पकड़ी गड़बड़ी अनूपपुर जिले में मार्च 2024 में मारा था छापा
ईओडब्ल्यू ने मार्च 2024 में अनूपपुर में छापा मारा। यहां अस्पताल में 200 से अधिक आइटम की खरीदी की बात की गई। एक आइटम को टेंडर में तीन-तीन जगह लिखा। 9200 रुपए वाली एग्जामिनेशन टेबल को 18000 और 34500 में खरीदा गया व 800 रुपए वाली इलेक्ट्रिक निडिल सिरिंज डेस्ट्रायॅर को 2400 रुपए में हर टेंडर में बड़े रेट को भी एल-1 दिखा दिया गया। कंपनी ने डॉक्यूमेंट ऑनलाइन नहीं किए
7 करोड़ 3 लाख रुपए की खरीदी में से पारिवारिक तीन फर्मों से ही 6 करोड़ 80 लाख रुपए की खरीदी कर ली गई। साइंस हाउस कंपनी ने दस्तावेजों के स्तर पर भी पारदर्शिता नहीं रखी। कई जरूरी डॉक्यूमेंट ऑनलाइन ही नहीं किए। फाइनेंशियल बिड के लिए वैध एक्सल फाइल भी अपलोड नहीं की। मशीनों को लगाने में तीन साल लगा दिए
पीओटीसी साइंस हाउस से स्वास्थ्य महकमे ने 27 मई 2020 को एग्रीमेंट किया कि वह 50 जिला चिकित्सालय और 35 सिविल अस्पतालों में वेटलीज रियेजेंट रेंटल मॉडल के जरिए सेंट्रल पैथोलॉजी लैब स्थापित करेगी। जून 2020 में पहली मशीन एक अस्पताल में लगाई गए। दो माह बाद दूसरी मशीन लगी। ऐसे करके 2022-23 में जाकर सभी 85 जगहों पर मशीनें स्थापित हुईं। जीएसटी काटने वाले बिल जून 2020 से ही कंपनी ने सरकार को दे दिया। केंद्र सरकार के नियमों के उल्लंघन का भी आरोप… केंद्र के नियम हैं कि किसी भी अस्पताल में 100 फीसदी सेवाएं आउटसोर्स पर नहीं दी जा सकती। केवल सुविधाएं बेहतर करने के लिए मदद ली जा सकती है। साइंस हाउस के मामले में इसका उल्लंघन हुआ।


