अटल बिहारी वाजपेयी यूनिवर्सिटी (एयू) के छठवें दीक्षांत समारोह में गुरुवार को प्रोटोकॉल से ज्यादा सादगी की मिसाल देखने को मिली। मंच की ओर बढ़ते समय पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने देखा कि उनके और राज्यपाल के लिए अलग से दो बड़ी कुर्सियां रखी गई हैं, जबकि अन्य अतिथियों के लिए सामान्य कुर्सी लगी हुई थीं। एयू ने इनके लिए हाई कोर्ट से विशेष कुर्सियां मंगवाई थीं। उन्होंने दोनों कुर्सियां हटवा दीं और बाकी अतिथियों के समान कुर्सी पर बैठकर समारोह की शुरुआत की। गुरुवार को एयू का दीक्षांत 45 मिनट देरी से शुरू हुआ। सत्र 2023-24 के 63 गोल्ड मेडलिस्ट छात्रों और 64 पीएचडी उपाधिधारकों को सम्मानित किया गया। इनमें से छह मेडल पाने वाली शशिबाला सिंह, 4 मेडल विजेता आशु राठौर, तीन-तीन मेडल पाने वाली त्विशा सिंह ठाकुर, राशि मुखर्जी, माधुरी राठौर, आरती और दो मेडल विजेता निधि साहू को मंच पर बुलाकर दिए गए। वहीं चार संकायों के शोधार्थी ‘हेमपुष्पा नायक, विनय प्रभा मिंज, संदीप कुमार टंडन और नीलिमा पांडेय’ को उपाधि प्रदान की गई। रामनाथ कोविंद बोले- ज्ञान और कौशल को हमें लगातार बढ़ाना होगा देश में लड़कियां लड़कों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ रही हैं। मेडल में 78% छात्राएं और केवल 14% छात्र हैं। उपाधि में 54% छात्र और 46% छात्राएं हैं। {विद्या धन ही सबसे बड़ा धन है। सीखना कभी बंद न करें। 21वीं सदी में एक बार सीखना पर्याप्त नहीं है। ज्ञान और कौशल को लगातार बढ़ाना होगा।{अपने अंदर सेल्फ-मैनेजमेंट, क्रिटिकल थिंकिंग, इमोशन इंटेलिजेंस जैसी स्किल विकसित करें। टेक्नॉलॉजी बदलती रहती है, लेकिन हमारे अंदर का ‘सॉफ्टवेयर’ जीवन भर काम आता है। {अपने लक्ष्य को पाने कड़ी मेहनत करें। कठिनाइयों से न घबराएं। सकारात्मक सोचें और सही दृष्टिकोण रखें-सफलता जरूर मिलेगी। {सफलता मिलने पर विनम्रता बनाए रखें, अहंकार न आने दें। {लंबी अवधि तक सफल रहने के लिए शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान दें। दिनचर्या में व्यायाम और योग शामिल करें। {जरूरतमंदों की मदद अवश्य करें-यही सच्चे अर्थों में राष्ट्र निर्माण है और इससे मन में संतोष मिलता है।


