लोकायुक्त और इनकम टैक्स ने पूर्व ट्रांसपोर्ट कॉन्स्टेबल सौरभ शर्मा के ठिकानों से 3 करोड़ कैश और 2 करोड़ कीमत की 2 क्विंटल चांदी की सिल्ली, 10 किलो चांदी के जेवर और 50 लाख का सोना बरामद किया है। सौरभ इस समय दुबई में है। दैनिक भास्कर ने जब एक मामूली से परिवहन कॉन्स्टेबल सौरभ शर्मा के पूरे करियर की परिवहन विभाग के सीनियर अफसरों से बात कर पड़ताल की, तो पता चला कि नौकरी लगने से लेकर उसके इस्तीफा होने तक की पूरी स्टोरी में सरकार की बड़ी कृपा रही है। कहने को वह एक कॉन्स्टेबल था, लेकिन मंत्री और अफसरों का सबसे चहेता था। अफसरों ने बताया कि उसे एमपी के आधे परिवहन चेक पोस्ट की जिम्मेदारी दे दी गई थी। इन चेकपोस्ट में आने वाले पूरे कैश को वो खुद डील करता था। चेकपोस्ट पर तैनात इंस्पेक्टर और दूसरे अफसरों का ‘शेयर’ वो खुद तय करता था। उसके काम में कोई अफसर और इंस्पेक्टर दखल नहीं देता था। पढ़िए किस तरह से सात साल में एक मामूली कॉन्स्टेबल ने करोड़ों की संपत्ति बनाई और पावर कॉरिडोर में अपना रसूख कायम किया.. 4 पॉइंट्स में जानिए सरकार की कृपा कैसे रही? 1. स्वास्थ्य विभाग की बजाय परिवहन विभाग में मिली अनुकंपा नियुक्ति परिवहन विभाग में पदस्थ सीनियर अफसरों बताते हैं कि सौरभ के पिता स्वास्थ्य विभाग में पदस्थ थे। साल 2016 में उनकी अचानक मृत्यु के बाद उनकी जगह अनुकंपा नियुक्ति के लिए सौरभ की तरफ से आवेदन दिया गया। स्वास्थ्य विभाग ने स्पेशल नोटशीट लिखी कि उनके यहां कोई पद खाली नहीं है। अधिकारियों के मुताबिक ये इसलिए किया गया ताकि सौरभ शर्मा को मनचाहे विभाग में अनुकंपा नियुक्ति मिल सके। अफसरों के मुताबिक आमतौर पर परिवहन विभाग में अनुकंपा नियुक्ति इतनी आसानी से नहीं होती। इसके लिए ऊंची पहुंच यानी राजनीतिक कॉन्टैक्ट होना बेहद जरूरी होता है। परिवहन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि 2016 की तत्कालीन सरकार में भी सौरभ के हाई लेवल पर संबंध थे। यही वजह थी कि उसकी नियुक्ति की प्रक्रिया बहुत तेजी से पूरी हुई। 2. पहले ऑफिस में पदस्थ, उसके बाद चेक पोस्ट का काम अफसरों के मुताबिक अक्टूबर 2016 में सौरभ की भर्ती के बाद उसकी पहली पोस्टिंग ग्वालियर परिवहन विभाग में हुई। मगर, जल्द ही उसे चेक पोस्ट पर नियुक्त कर दिया गया। साल 2019 तक वह चेक पोस्ट पर रहा इसके बाद वह फ्लाइंग स्क्वॉड में आ गया। इस समय प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी। मार्च 2020 में जब मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार का तख्तापलट हुआ और शिवराज सरकार की वापसी हुई, तो मंत्रालय में भी फेरबदल हुए। सीनियर अधिकारी कहते हैं कि जुलाई 2020 में चेकपोस्ट पर नई व्यवस्था बनी। अधिकारियों को भरोसे में न लेते हुए मालवा निमाड़ के चेक पोस्ट का काम सौरभ के सुपुर्द कर दिया गया। उस समय के अफसर इस फैसले से नाराज थे। अधिकारियों के मुताबिक 1 जुलाई 2024 से पहले( इस तारीख को सरकार ने चेकपोस्ट बंद करने का फैसला लिया है) एमपी में कुल 47 परिवहन चेकपोस्ट थे, इनमें से 23 चेकपोस्ट सौरभ संभालता था। उसका दखल सीधे हाई लेवल पर था। उसने चेक पोस्ट के प्रभारी अधिकारियों को दरकिनार कर मनमाफिक व्यवस्थाएं बनाई। 3. चेकपोस्ट की रकम कहां जाएगी, यह भी सौरभ तय करता था अधिकारियों के मुताबिक हर चेकपोस्ट से हर दिन की निर्धारित रकम तय थी। चेकपोस्ट से वह खुद ये पैसे कलेक्ट करता था और वह खुद उसका डिस्ट्रीब्यूशन करता था। परिवहन विभाग के अधिकारी कहते हैं कि ये रकम चेकपोस्ट से लेकर उसे व्यवस्थित ठिकानों तक खुद सौरभ पहुंचाता था। यही वजह है कि परिवहन विभाग के अधिकारियों का उस पर नियंत्रण नहीं था। सूत्रों का यह भी कहना है कि 2016 से 2023 तक सरकार और मंत्री जरूर बदलते रहे, लेकिन हर सरकार और हर परिवहन मंत्री के बंगले में सौरभ का बेरोकटोक आना जाना था। दैनिक भास्कर ने जब इस संबंध में शिवराज सरकार में परिवहन मंत्री रहे और वर्तमान खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत से पूछा तो जवाब मिला कि वे सौरभ शर्मा को नहीं जानते। हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा कि राजनीतिक जीवन में कई लोग आते–जाते हैं, मुलाकात करते हैं। हर मुलाकात करने वाले से आपके नजदीकी संबंध नहीं होते। परिवहन विभाग में भी सैकड़ों कॉन्स्टेबल होते हैं, वो मिलते रहते हैं। गोविंद सिंह से पहले परिवहन मंत्री रहे भूपेंद्र सिंह से जब संपर्क किया तो उनके प्रतिनिधि ने जवाब दिया कि वे इस संबंध में कुछ नहीं कहेंगे। 4. विभागीय जांच के दौरान ही इस्तीफा मंजूर किया परिवहन विभाग के अधिकारी कहते हैं कि चेकपोस्ट पर मनमाने तरीके से वसूली की शिकायतें हुईं। 16 जुलाई 2022 को खुद केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मप्र के तत्कालीन मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैस को पत्र लिखकर चेकपोस्ट पर अवैध वसूली की शिकायत की। उन्होंने पत्र में लिखा कि महाराष्ट्र और पंजाब के ट्रांसर्पोटर्स ने अवैध वसूली की शिकायत की है, इससे प्रदेश की छवि खराब हो रही है। पत्र की कॉपी तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और तत्कालीन परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत को भी भेजी गई थी। इसके बाद सौरभ शर्मा के खिलाफ अवैध वसूली की जांच शुरू हुई। अधिकारियों का कहना है कि इस जांच के बीच में ही 2023 में उसका इस्तीफा मंजूर हो गया। जबकि, नियम ये कहता है कि जांच पूरी होने तक किसी भी कर्मचारी-अधिकारी का इस्तीफा मंजूर नहीं होता। अधिकारियों के मुताबिक सौरभ ने इस्तीफा देने के बाद 3 महीने का नोटिस पीरियड भी पूरा नहीं किया, तीन महीने की सैलरी जमा कराई और उसका इस्तीफा मंजूर हो गया। 21 दिसंबर को दुबई से लौटेगा सौरभ
सौरभ की निजी जिंदगी को जानने वाले कहते हैं कि सौरभ मूल रूप से ग्वालियर का रहने वाला है। उसकी पत्नी दिव्या का मायका जबलपुर का है। 4 साल पहले ही सौरभ परिवार सहित भोपाल शिफ्ट हो गया था। उसकी पत्नी का जन्मदिन दुबई या दिल्ली की एक फाइव स्टार होटल में मनाया जाता था। सौरभ की पत्नी दिव्या भी पावर कॉरिडोर में पहचानी जाती हैं। दिव्या भोपाल के कई नामचीन क्लब की मेंबर भी हैं। सौरभ के भोपाल स्थित मकान पर जब लोकायुक्त पुलिस ने दबिश दी, उस वक्त भी वह दुबई में था। शेड्यूल के मुताबिक उसे 21 दिसंबर को दुबई से लौटना है। 52 किलो सोना और 11 करोड़ कैश से भी जुड़ रहा कनेक्शन
सौरभ के ठिकानों पर लोकायुक्त की कार्रवाई चल रही थी, इसी बीच 19 और 20 दिसंबर की रात इनकम टैक्स की टीम ने मेंडोरी के जंगल में एक कार से 52 किलो सोने की सिल्लियां और 11 करोड़ रुपए नगद बरामद किए हैं। कार चेतन गौर की बताई जा रही है। चेतन और सौरभ दोस्त हैं। चेतन भी ग्वालियर का रहने वाला है। हालांकि इनकम टैक्स अधिकारियों का कहना है कि अभी वे इस बात की जांच कर रहे हैं कि सोना और नगदी किसका है? वजह ये है कि इनकम टैक्स भोपाल में बिल्डर्स के ठिकानों पर भी जांच कर रही है। इधर, लोकायुक्त डीजी जयदीप प्रसाद का कहना है कि 52 किलो सोना और 11 करोड़ रुपए नगदी जब्त करने की कार्रवाई इनकम टैक्स ने की है। वे ही बता पाएंगे कि ये किसका है? खबर में पोल पर अपनी राय दे सकते हैं। ये खबर भी पढ़ें…. जमीन में गाड़ रखी थी 2 क्विंटल चांदी: भोपाल में टाइल्स उखाड़कर निकाली 200 सिल्लियां; पूर्व आरटीओ आरक्षक के यहां 17 घंटे चली रेड आरटीओ से वीआरएस ले चुका आरक्षक सौरभ शर्मा जयपुरिया स्कूल में अपने ऑफिस का संचालन करता है। यहां उसने 200 चांदी की सिल्लियों को फ्लोर के नीचे गाड़ रखा था। अंडर ग्राउंड लॉकर बना रखा था। ऊपर कार्पेट बिछा था। लोकायुक्त की टीम ने इस कार्पेट को हटाने के बाद टाइल्स चेक किए। ये टाइल्स बजाने पर अंदर से खोखले होने जैसा साउंड कर रहे थे। पूरी खबर पढ़ें… दिग्विजय बोले- ईडी-सीबीआई भाजपा नेताओं पर कार्रवाई नहीं करती, 20 साल में भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार बढ़ा ‘पिछले 20 साल में भाजपा की सरकार में भ्रष्टाचार बढ़ा है, भाजपा के कार्यकर्ता और दलाल कहां से कहां पहुंच गए। प्रदेश के सभी जिलों में यही स्थिति है। ईडी, सीबीआई कभी इन लोगों पर कार्रवाई नहीं करती। अगर भाजपा के लोगों पर कार्रवाई करे तो मालूम पड़ेगा।’ यह बात रतलाम पहुंचे पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने शनिवार सुबह सर्किट हाउस में कही। पूरी खबर पढ़ें…


