शहर के 72 एरिया में संचालित 50 हजार से अधिक इंडस्ट्री यूनिट्स के लिए आने वाले कुछ महीने बड़ी अनिश्चितता वाले हो सकते हैं। क्योंकि पंजाब सरकार की मिक्स लैंड यूज पॉलिसी की अवधि समाप्त होने के करीब है, और ये यूनिट्स उसी पॉलिसी के तहत अस्थाई राहत के तहत चल रहे हैं। ज्यों ज्यों समय करीब आता जा रहा है छोटे और मझोले उद्योगों की चिंता बढ़ गई है। उद्योग संगठनों ने सरकार से स्थायी समाधान की मांग की है। स्मॉल स्केल इंडस्ट्री के प्रधान जसविंदर सिंह ने कहा कि यदि सरकार ने इस समस्या का पक्का हल नहीं निकाला तो एमएसएमई के अधीन आने वाली हजारों छोटी इकाइयों का कारोबार बंद होने की कगार पर पहुंच जाएगा। अब तक बनी किसी भी सूबा सरकार ने इंडस्ट्री को स्थायी राहत नहीं दी है। हर बार अस्थायी समाधान देकर उद्योगों को असमंजस में रखा जाता है। यूनाइटेड साइकिल पार्ट्स एंड मैन्युफैक्चर एसोसिएशन के प्रधान हरसिमरजीत सिंह लक्की ने बताया कि इस मुद्दे को लेकर विधायक कुलवंत सिंह सिद्धू, मंत्री संजीव अरोड़ा और मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान से कई बार अपील की जा चुकी है। चार साल बीत जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया। उन्होंने कहा कि कारोबारी वर्ग मौजूदा सरकार से काफी निराश हैं। न तो जीएसटी रिफंड की समस्या का समाधान हुआ और न ही मिक्स लैंड यूज नीति पर स्पष्टता दी गई। यहां तक कि सरकार बनने से पहले उद्योगों से किए गए वादों लेबर सुरक्षा, बुनियादी ढांचा और ट्रैफिक प्रबंधन जैसे मुद्दों पर भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। वहीं उद्योगपति सतनाम सिंह मक्कड़ ने कहा कि इंडस्ट्री एरिया की हालत बदतर हो चुकी है। सड़कों पर गड्ढे, हर जगह जाम और सफाई व्यवस्था की कमी से कारोबार प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि न तो बिजली की नियमित सप्लाई मिलती है और न ही प्रशासनिक सहयोग। इन समस्याओं के कारण इंडस्ट्री की ग्रोथ रुक गई है। उद्योग संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द स्थायी समाधान नहीं निकाला गया तो हजारों परिवारों की रोजी-रोटी पर असर पड़ेगा और पंजाब की औद्योगिक छवि को भी नुकसान होगा।


