77 साल की उम्र में की दूसरी पीएचडी:कोटा के घनश्याम चंद्र ने संस्कृत में हासिल की पीएचडी, 19 डिग्री प्राप्त कर चुके

कोटा के रहने वाले 77 साल के घनश्याम चंद्र का हौसला और उनके शोध व पढ़ाई को लेकर रूझान का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने 77 साल की उम्र में भी पीएचडी हासिल की है। कोटा यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में शुक्रवार को घनश्याम चंद्र उपाध्याय को संस्कृत में पीएचडी की उपाधि दी गई। घनश्याम की यह दूसरी पीएचडी संस्कृत में ही है। पहली पीएचडी उन्होंने संस्कृत में ही की थी। जिसमें दुर्गा सप्तशती को लेकर उनका रिसर्च था। उन्होंने बताया कि दुर्गा सप्तशती हमारे यहां आज भी अधूरी पढ़ी जा रही है। इसे पूरा जीवन लगाकर पूरा किया है। इसका प्रकाशन होना बाकी है, बारह भाषा में इसका अनुवाद करवाया गया है। वहीं अब उन्होंने चंडी शतक की तुलनाओं का अध्ययन विषय पर पीएचडी की है। उन्होंने कहा कि आज चंडी शतक विलुप्त सा हो गया है, प्रचलन में नही है। उन्होंने बताया कि मेरा शुरू से पढ़ाई को लेकर और शोध कार्य को लेकर रुझान रहा है। मैने मेरी जिंदगी का कोई निर्णय कभी नहीं बदला है और पढ़ने का निर्णय भी मेरा बना हुआ है। घनश्याम हायर सैकंडरी स्कूल में लेक्चरर रहे हैं और प्रिसिंपल पद से रिटायर हुए हैं। उनके पास बीएबीएड, एमए हिंदी, एमए अंग्रेजी, एमएससी जूलॉजी समेत 19 डिग्री है। शुक्रवार को आयोजित कोटा यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल हरिभाऊ बागडे के हाथों उन्हें उपाधि दी गई। राज्यपाल बोले- शिक्षक बच्चों से चर्चा करते रहे
दीक्षांत समारोह में संबोधित करते हुए राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने कहा कि शिक्षक को अपने स्टूडेंटस के साथ हर रोज चर्चा करनी चाहिए। विषयों पर सवाल करने चाहिए ताकि बच्चे जवाब तलाशे। इससे बच्चों में जिज्ञासा होगी और वे शोध की तरफ बढे़गें। आचार्य का मतलब आदर्श आचरण के लिए प्रेरित करने वाला होता है। नई शिक्षा नीति इसी आलोक में तैयार की गई है ताकि बच्चों का सर्वांगीण विकास हो। वहीं समाज और देश आगे बढ़ता है जहां शिक्षा का प्रचार होता है। लेकिन डिग्री लेने तक ही स्टूडेंट्स सीमित न रह जाए ये भी देखना जरूरी है। उन्होंने युवाओं से आग्रह भी किया कि वे अपनी व्यवसाय के साथ साथ खेती से भी जुडे़। उन्होंने कहा कि आज तक हम जो इतिहास पढ़ते आ रहे हैं वह सब विदेशी और मुगलों पर आधारित रही है। इसमें अब बदलाव आ रहा है। उन्होंने कहा कि डिग्री के बाद स्टूडेंट्स अब आरपीएससी और यूपीएससी जैसी परीक्षाओं की तैयारी से जुडे। 80,117 विद्यार्थियों को मिली डिग्रियां
दीक्षांत समारोह कृषि प्रबंध संस्थान स्थित ऑडिटोरियम, नयापुरा में आयोजित किया गया। जिसमें साल 2023 की परीक्षाओं में पास हुए 80,117 विद्यार्थियों को यूजी, पीजी एवं पीएच.डी. की उपाधियां प्रदान की जाएंगी। समारोह में मेरिट में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले 59 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए जिनमें 17 छात्र एवं 42 छात्राएं शामिल हैं। कुलगुरु प्रो. बी.पी. सारस्वत ने कहा कि 80 हजार से अधिक विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान करना कोटा विश्वविद्यालय की शैक्षणिक क्षमता, समावेशी दृष्टिकोण और गुणवत्ता-आधारित शिक्षा का प्रमाण है। वर्ष 2023 के लिए कुल 81 शोधार्थियों को पीएच.डी. उपाधि प्रदान की गई। 44 छात्र एवं 37 छात्राएं सम्मिलित हैं। कला संकाय की पीजी विद्यार्थी वैशाली अग्रवाल को कुलाधिपति पदक तथा वाणिज्य संकाय के यूजी विद्यार्थी दीपांश को कुलपति पदक प्रदान किया गया।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *