8 घंटे ब्रेकडाउन, 16 घंटे में सिर्फ 602 टन गन्ने की पेराई, 490 क्विं. शक्कर उत्पादन

भास्कर न्यूज | बालोद गन्ने की कमी के चलते शुगर मिल में ब्रेकडाउन की स्थिति बन रही है। इसका अंदाजा इसी से लगा सकते है कि बुधवार को सिर्फ 602 मीट्रिक टन गन्ने की पेराई हो पाई। जिससे 490 क्विंटल शक्कर और 35 टन मोलासिस उत्पादन हुआ। गन्ने की कमी व अन्य कारणों से 24 में से 8 घंटे ब्रेकडाउन की स्थिति रही। हालांकि रिकवरी रेट 11.27% रही। वहीं इसके पहले मंगलवार को सिर्फ 450 टन गन्ने की पेराई से 95 क्विंटल शक्कर और 27 टन मोलासिस उत्पादन हुआ था। इस लिहाज से दो दिन में 1052 टन गन्ने की पेराई से 585 टन शक्कर उत्पादन हुआ। यह स्थिति तब है, जब एमडी राजंेद्र राठिया, जीएम जीएल देवांगन दावा कर रहें है कि बालोद के अलावा अन्य जिले के किसानों को टोकन जारी किया जा रहा है ताकि पर्याप्त मात्रा में गन्ना उपलब्ध हो सकें। दूसरी ओर सच्चाई कुछ और है। पिछले कई सप्ताह से गन्ने की कमी होने से कई घंटे तक ब्रेकडाउन की स्थिति बन रही है। हालांकि गन्ने की कमी के बावजूद ओवरऑल रिकवरी रेट 10% से ज्यादा है। बुधवार तक रिकवरी रेट 10.26% था। जिसे विभागीय अफसर शुभ संकेत मान रहें है। दावा किया जा रहा है कि ब्रेकडाउन की स्थिति बनने के बावजूद रोजाना गन्ने की पेराई हो रही है। इस सीजन 60 से 65 हजार टन गन्ना खरीदी का प्रबंधन ने लगाया अनुमान प्रबंधन ने इस सीजन शुगर मिल में पेराई, शक्कर उत्पादन के लिए 60 से 65 हजार मीट्रिक टन गन्ना पहुंचने का अनुमान लगाया है। जिले के 5 ब्लॉक से 40 हजार टन गन्ना पहुंचने का अनुमान है। वहीं धमतरी, कांकेर, दुर्ग, बेमेतरा, रायपुर सहित अन्य जिले से 20 से 25 हजार टन गन्ना पहुंचने का अनुमान विभागीय अफसरों ने लगाया है। प्रबंधन के अनुसार शुगर मिल में गन्ने की पेराई 22 दिसंबर से शुरु हुई है। तब से अब तक रिकवरी रेट में डेढ़ से दो प्रतिशत तक का इजाफा हो चुका है। जब पेराई शुरु हुई थी, तब रिकवरी रेट 8.50% के आसपास रहा। हर साल जब पेराई की शुरुआत होती है, तब रिकवरी रेट 8 से 9 प्रतिशत के आसपास रहता है। एक माह से रोजाना 1000 टन से कम गन्ने की पेराई भले ही रिकवरी रेट बेहतर है लेकिन प्रबंधन यह भी स्वीकार कर रही है कि गन्ने की आवक कम होने से ब्रेकडाउन की स्थिति बन रही है। एक माह से रोजाना एक हजार टन से कम गन्ने की पेराई हो रही है। दावा किया जा रहा है कि ब्रेकडाउन की स्थिति न बने इसलिए बालोद के अलावा दूसरे जिले के किसानों को भी टोकन जारी कर रहें है बावजूद पर्याप्त मात्रा में गन्ना बेचने किसान नहीं पहुंच रहें है। इसकी एक वजह यह भी है कि वर्तमान में किसान समर्थन मूल्य में धान बेचने में व्यस्त है। रिकवरी रेट 10 प्रतिशत से ज्यादा पर फोकस कर रहे हैं, उत्पादन पर नहीं शुगर मिल प्रबंधन उत्पादन के बजाय रिकवरी रेट 10% से ज्यादा पर फोकस कर रही है। एमडी राजेंद्र राठिया, जीएम जीएल देवांगन गन्ने की कमी के बावजूद रिकवरी रेट आगे भी 10% से ज्यादा रहने का दावा कर रहें है। एमडी के अनुसार भले ही रोजाना कम गन्ने की पेराई हो रही है बावजूद रिकवरी रेट 10% से ज्यादा तक पहुंचना शुभ संकेत है। ओवरऑल यह स्थिति आगे भी बनी रहेगी। ऐसा दावा विभागीय अफसर कर रहें है। हालांकि गन्ने की कमी से आगे स्थिति बदल भी सकती है। पर्याप्त मात्रा में पेराई के लिए गन्ना उपलब्ध हो सकें। इसके लिए बालोद के अलावा दूसरे जिले के किसानों को भी टोकन जारी किया जा रहा है।

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