छत्तीसगढ़ में APK फाइल भेजकर ऑनलाइन ठगी करने वाले बिहार के एक गिरोह के 9वीं पास तीन ठगों को बालोद पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने डौंडीलोहारा थाना क्षेत्र के ग्राम सहगांव निवासी एक रिटायर्ड बीएसपी कर्मचारी को निशाना बनाते हुए उनके रिटायरमेंट के बाद मिले पैसों में से 12 लाख रुपए से अधिक की रकम उड़ा ली थी। हालांकि, बालोद पुलिस ने सिर्फ एक महीने के भीतर तकनीकी जांच और ट्रैकिंग के जरिए तीनों आरोपियों को बिहार से पकड़ लिया है। पुलिस ने ठगी में उपयोग की गई कार, मोबाइल, लैपटॉप और डिजिटल बैंक कार्ड सहित अन्य सामग्री भी जब्त की है। मैसेज क्लिक करते ही हैक हो जाता था मोबाइल बालोद एसपी योगेश कुमार पटेल ने बताया कि बिहार के जमुई जिले के ग्राम झुंडों निवासी दो सगे भाई नीतीश कुमार दास (22) और राकेश कुमार दास (21), उनका रिश्तेदार ग्राम खैरा निवासी अरविंद कुमार दास (18) को गिरफ्तार किया गया है। ये आरोपी वॉट्सऐप के जरिए लोगों को शिकार बनाते थे। वे प्रधानमंत्री आवास योजना, किसान सम्मान निधि जैसी सरकारी योजनाओं के नाम बदल-बदलकर APK फाइल का मैसेज भेजते थे। जैसे ही कोई व्यक्ति उस फाइल को ओपन करता था। उसका वॉट्सऐप और पूरा मोबाइल हैक हो जाता था। अब जानिए कैसे चलता है ठगी का पूरा खेल… (दैनिक भास्कर ने गिरफ्तार ठगों से बातचीत में जाना ठगी का पूरा तरीका) पहला आरोपी अरविंद कुमार दास, उम्र – 18 वर्ष, निवासी – ग्राम बटपाल, थाना चकई, जिला जमुई (बिहार) कार में घूमते दिखे ठग: झारखंड के देवघर में ली थी ट्रेनिंग, बिहार लौटकर जीजा और उसके भाई को सिखाया ठगी का काम आरोपी अरविंद कुमार दास ने बताया कि, करीब डेढ़ साल पहले वो अपने रिश्तेदार के पास देवघर (झारखंड) गया था। देवघर में साइबर ठगों का बड़ा हब है। वहां उसने कई लोगों को कार, बुलेट और महंगे मोबाइल फोन का शौकिया जीवन जीते देखा। जिसके बाद उसने करीब तीन महीने तक हैकिंग की ट्रेनिंग ली। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद अरविंद ने मोबाइल के जरिए दूसरों का मोबाइल हैक करना शुरू किया और हजारों लोगों को APK फाइल भेज कर मोबाइल हैक किया। बाद में जब वह अपने जीजा नीतीश कुमार दास से मिला तो उसने यह तरीका उन्हें भी सिखाया। इसके बाद वह अपने जीजा नीतीश, उसका छोटा भाई राकेश के साथ मिलकर ठगी का यह धंधा आगे बढ़ाने लगा। दूसरा आरोपी – नीतीश कुमार दास, उम्र – 22 वर्ष, ग्राम झुंडों, थाना खैरा, जिला जमुई (बिहार) मुख्य सरगना वॉट्सऐप पर देता था कॉन्टैक्ट नंबर और APK फाइल, हैकिंग कर अकाउंट खाली करने पर मिलता था 15% कमीशन दूसरा आरोपी नीतीश कुमार दास ने खुलासा किया कि उनके गिरोह का मुख्य सरगना कौन है और कहां रहता है, यह जानकारी उन्हें भी नहीं है। सरगना हमेशा बाहर सुनसान जगहों पर ही मिलता था और वॉट्सऐप ग्रुप में जोड़कर कॉन्टैक्ट नंबर व अलग-अलग APK फाइलें भेजता था। जिनमें वायरस डले रहते थे। वह उनके दिए गए कॉन्टैक्ट नंबरों को वॉट्सऐप पर सर्च कर डीपी देखकर लोगों को मैसेज करते और उन्हें .APK फाइल ओपन करने के लिए कहते। जैसे ही कोई व्यक्ति फाइल ओपन करता, उसका मोबाइल हैक हो जाता था। यदि मोबाइल नंबर किसी बैंक खाते से लिंक रहता तो आरोपी उसी का ई-सिम बनाकर तुरंत पैसे निकाल लेते। इसके बाद वही फाइल पीड़ित के पूरे वॉट्सऐप कॉन्टैक्ट में भेज दी जाती। जिससे उसके दोस्त, रिश्तेदार और परिचित भी शिकार बन जाते थे। नीतीश ने बताया कि ठगी से निकली रकम का सिर्फ 15 प्रतिशत हिस्सा ही उन्हें कमीशन के रूप में मिलता था। डौंडीलोहारा के रिटायर्ड कर्मचारी से की गई 12 लाख की ठगी में उन्हें 1 लाख 20 हजार रुपए का मुनाफा हुआ। तीसरा आरोपी – राकेश कुमार दास, उम्र 21 वर्ष, ग्राम झुंडों, थाना खैरा, जिला जमुई (बिहार) दो माह पहले हुई थी शादी, ठगे हुए पैसों से शुरू करना चाहता था डीजे साउंड सर्विस; डिजिटल कार्ड बनाकर निकाले रकम तीसरे आरोपी राकेश कुमार दास ने बताया कि डौंडीलोहारा के रिटायर्ड बीएसपी कर्मचारी से हुई ठगी के पैसों में से 80 हजार रुपए अपने भाई की टॉप मॉडल वेन्यू कार की किस्त भरने में लगाए। उन्होंने बताया कि ठगी के रकम फर्जी पहचान पत्र और नकली मोबाइल नंबर के जरिए बनाए गए जियो पेमेंट बैंक, जूडियो कार्ड, ओम्नी कार्ड और पीएनबी एटीएम कार्ड के माध्यम से खर्च की जाती थी या निकाल ली जाती थी। राकेश ने बताया कि उसकी शादी दो माह पहले ही हुई है और वह गांव में डीजे बजाने का काम करता था। उसका इरादा ठगी से मिले पैसों से खुद का डीजे साउंड सर्विस शुरू करने का था। इसी लिए उसने लैपटॉप भी खरीदा था। राकेश ने खुलासा किया कि मुख्य सरगना उन्हें भरोसा दिलाता था कि इस धंधे में पकड़े जाने का कोई खतरा नहीं है और दूसरे प्रदेश की पुलिस कभी उन तक नहीं पहुंच सकती। लेकिन ठगी का पर्दाफाश होते ही वे गिरफ्तार हो गए। भास्कर ने आपको ठगी का तरीका बताया: अब जानिए कैसे इन ठगों से सुरक्षित रह सकते हैं आप बालोद एसपी योगेश कुमार पटेल और एसडीओपी देवांश सिंह राठौर के अनुसार ठग सोशल मीडिया या अन्य माध्यम से अनजान लिंक या APK फाइल डाउनलोड करवा लेते हैं। जैसे ही यह फाइल डाउनलोड होती है, मोबाइल हैक हो जाता है। इससे बचने के लिए सबसे जरूरी है कि किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और संदिग्ध मैसेज कभी न खोलें। यदि मोबाइल हैक हो जाए तो सबसे पहले इंटरनेट बंद करें। मोबाइल का डाटा और वाई-फाई तुरंत बंद कर दें, ताकि हैकर को आगे एक्सेस न मिल सके। उसके बाद संदिग्ध फाइल को अन-इंस्टॉल करें। साथ ही अपने बैंक और UPI अकाउंट को तुरंत अस्थायी रूप से ब्लॉक कर दें। यदि मोबाइल किसी बैंक अकाउंट या UPI से लिंक है तो कार्ड/UPI को ब्लॉक करना बेहद जरूरी है। इसके अलावा संबंधित सिम कंपनी के ऑफिस जाकर तुरंत ई-सिम या सिम को ब्लॉक कराएं। ऐसा करने से ठगी से बचा जा सकता है।


