9 माह में 55 प्रतिशत राशि ही खर्च, बजट के 20 हजार करोड़ रुपए हो सकते हैं सरेंडर

वर्तमान वित्तीय वर्ष 2024-25 के 9 माह बीत चुके हैं। 31 दिसंबर 2024 तक करीब 70,000 करोड़ रुपए ही खर्च हुए हैं। यह कुल बजट 1.29 लाख करोड़ की करीब 55% राशि है। महालेखाकार द्वारा राज्य सरकार को इस खर्च की जानकारी दी गई है। अब वर्तमान वित्तीय वर्ष के 3 माह में 45% खर्च करने की चुनौती राज्य सरकार के पास है। पिछले वित्तीय वर्ष 2023-24 में इन नौ माह की अवधि में करीब 65000 करोड़ रुपए खर्च हुए थे। उसकी तुलना में इस बार करीब 5000 करोड़ रुपए अधिक खर्च हुए हैं। इसमें पूंजीगत व्यय गत वर्ष की तुलना में करीब 10% अधिक है। इस साल लोकसभा और विधानसभा चुनाव के आचार संहिता के कारण बीच की अवधि में खर्च की रफ्तार थोड़ी धीमी रही है, लेकिन अब रफ्तार तेज हुई है। सूत्रों का कहना है कि सरकार के आय और व्यय के हिसाब से कुल बजट का 20 हजार करोड़ रुपए सरेंडर हो सकता है। बहरहाल, 1.29 लाख करोड़ के बजट में 1.10 लाख करोड़ तक ही खर्च हो सकने की स्थिति है। बकाया केंद्रीय सहायता मिलने पर खर्च बढ़ सकता है। मालूम हो कि पहले पूंजीगत व्यय मद में कम राशि खर्च होती थी। इसमें बढ़ोतरी हुई है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में झारखंड सरकार ने पूंजीगत व्यय मद में 14,015 करोड़ रुपए खर्च किया था। वर्ष 2024-25 में यह खर्च 21,569 करोड़ रुपए रहा। केंद्र ने राज्यों को पूंजीगत व्यय के लिए 50 वर्ष का ब्याज रहित ऋण दे रखा है। पूंजीगत व्यय (कैपिटल एक्सपेंडिचर) वह खर्च होता है जो दीर्घकालिक संपत्ति या आधारभूत संरचनाओं की खरीद, निर्माण या सुधार के लिए किया जाता है। यह खर्च एक बार में किया जाता है और इसका लाभ कई वर्षों तक मिलता है। विधानसभा के कार्यक्रम कारण क्या : राजस्व वसूली 56.85% ही चालू वित्तीय वर्ष के नौ माह में राज्य की राजस्व वसूली 56.85% ही हुई है। वर्ष 2024-25 में सरकार का अपना राजस्व जुटाने वाले (वाणिज्य) कर विभाग, उत्पाद विभाग, खनन विभाग, परिवहन विभाग, भू-राजस्व एवं निबंधन विभाग की वसूली का लक्ष्य 49,700 करोड़ है। 31 दिसंबर तक 28,253 करोड़ रुपए ही वसूली हुई है। यह राजस्व लक्ष्य से 21447 करोड़ रुपए पीछे है। विभिन्न योजनाओं के लिए केंद्र से राज्य को 16,900 करोड़ मिलना है। इसमें से अबतक करीब 5000 करोड़ ही मिला है। वित्तीय प्रबंधन : खजाने की स्थिति संतोषजनक जानकारी के अनुसार, वैसे खजाने की स्थिति मोटे तौर पर संतोषजनक है। मंईंयां सम्मान योजना के कारण कई विभागों से योजना राशि सरेंडर कराने और उसका पुर्विनयोग से वित्तीय संतुलन बना हुआ है। केंद्र सरकार के ब्याज रहित कर्ज देने की नीति से भी राज्य की वित्तीय स्थिति पिछले कुछ वर्षों से मजबूत हो रही है। केंद्र सरकार ने भी राज्यों को 50 वर्षों के लिए ब्याज रहित कर्ज देने की घोषणा की है। राज्य के अपने स्रोतों से मिलने वाले राजस्व का हिस्सा भी बढ़ा है। राजकोषीय घाटा नियंत्रित रहा है। राज्य का अपने कर और गैर कर स्रोतों से मिलने वाले राजस्व का अंश बढ़ने से सरकार के महंगे दर पर लिए गए कर्ज को समय से पहले लौटाने के फैसले से ब्याज खर्च में कमी आई है। वित्तीय संकट से बचने के लिए कंसोलेटेड सिंकिंग फंड बना भविष्य में वित्तीय संकट से बचने के लिए राज्य सरकार ने एक कंसोलेटेड सिंकिंग फंड बनाया है। 3 साल में इस फंड में 600 करोड़ रुपए जमा किए गए हैं। इसमें हर साल बकाया ऋण का 5 प्रतिशत जमा होगा। बजट सत्र प्रस्ताव को मिली मंजूरी… राज्यपाल का अभिभाषण 24 फरवरी को राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने प्रस्तावित बजट सत्र पर मंजूरी दे दी है। बजट सत्र 24 फरवरी से शुरू होगा और 27 मार्च तक चलेगा। 3 मार्च को वित्तीय वर्ष 2025-26 का बजट पेश होगा। 28 फरवरी को अनुपूरक बजट पेश होगा।

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