96 घंटे की ट्रैकिंग, कंफर्म हुआ इसके बाद अनल के दस्ते को टारगेट कर उतरे कमांडो

ऋषिकेश सिंह देव | चाईबासा झारखंड में अब तक का सबसे बड़ा नक्सली इनकाउंटर के दूसरे दिन भी माओव दियों व कमांडो के बीच फायरिंग हुई। गुरुवार को जहां कुमड़ी इलाके में 15 को मारा। वहीं, दूसरे दिन दो और माओवादी ढेर हुए। ये लाशें दुलाईगाढ़ा के पास मिले हैं। अनल दा के दस्ते में 21 कैडर थे। जिसमें 2.35 करोड़ का इनामी नक्सली अनल के अलावे छह इनामी नक्सली व अन्य 10 लोकल नक्सली हैं। जिसमें चार महिला नक्सली भी मारी गईं हैं। बहरहाल ऑपरेशन मेगाबुरु के लिए 18 जनवरी से ही अनल दा के दस्ते की ट्रैकिंग शुरू हो गई थी। वह नुआगांव से कुमडीह की ओर रसद, पैसे की जुगाड़ में निकला था। इसकी भनक लगी तो पहले 96 घंटे तक ट्रैकिंग हुआ, वेरीफाई किया गया। इसके बाद कोबरा के तीन बटालियन के कमांडो गुरिल्ला युद्ध के लिए जंगल में उतर गए। पिछले 40 घंटे से कमांडो जंगल में ही हैं। बता दें कि इस दस्ते में एक करोड़ का इनामी मिसिर बेसरा नहीं था। सारंडा में मुठभेड़ में इनामी नक्सली अनल उर्फ पतिराम माझी के साथ मारे गए तांतनगर प्रखंड के इलीगाड़ा गांव का रहने वाला युवक बुलबुल उर्फ डूबलू आल्डा भी शामिल था। उसकी मौत की खबर पाकर 70 वर्षीय बुजुर्ग मां शुरू आल्डा का रो-रोकर बुरा हाल हो गया है। बुलबुल रोजगार की तलाश में गुजरात जाने की बात कह कर वर्ष 2019 में घर से निकला था। इसके बाद 2025 सितंबर महीने में विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर एक दिन के लिए घर आकर लौट गया था। अब सुरक्षा बल और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में मारे जाने की खबर मिलने पर गांव वाले लोग भी अचंभित हैं। मां शुरू आल्डा भावुक होकर बताती है कि बुलबुल 6 पुत्रों में सबसे छोटा था। जबकि उनके तीन बड़े भाइयों की मृत्यु पहले ही बीमारी से हो चुकी है। नक्सली मुठभेड़ में मारे जाने की खबर से मैं काफी आहत हूं। मुझे नहीं मालूम था कि मेरा बेटा नक्सली बन गया है। पत्नी के छोड़ जाने के बाद बिगड़ गया बुलबुल 6 साल पूर्व बुलबुल की शादी हुई थी। कुछ माह रहने के बाद दोनों पति-पत्नी के बीच किसी बात को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया। दोनों के बीच विवाद इतनी बढ़ गया कि दोनों एक-दूसरे से अलग हो गए। इसके बाद से वह तनाव में रहने लगा था। पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने की खबर देने के लिए शुक्रवार को तांतनगर ओपी की पुलिस इलीगाड़ा गांव पहुंची थी। भाइयों ने सरेंडर कराने का किया था प्रयास बुलबुल के बड़े भाइयों को उसके नक्सली बनने की भनक लग गई थी। उसी दौरान तत्कालीन ओपी प्रभारी को इसकी सूचना देकर उसके बड़े भाइयों ने सरेंडर कराने का बहुत प्रयास किया, लेकिन उसने किसी की बात नहीं सुनी। वह दस्ता छोड़कर नहीं लौटा। अंततः उसे पुलिस की गोली खाकर मौत को गले लगाना पड़ा। सरेंडर करें बचे-खुचे नक्सली : एसपी सारंडा में पुलिस और सुरक्षा बलों को मिली बड़ी सफलता को चाईबासा के एसपी अमित रेणु ने अपनी टीम की बड़ी उपलब्धि बताया है। एसपी ने कहा कि सारंडा का यह पहला सक्सेसफुल ऑपरेशन है, जिसमें बड़ी उपलब्धि मिली है। इसका पूरा क्रेडिट हमारी टीम को जाता है। एसपी ने कहा कि जब उन्होंने यहां योगदान दिया था तो उस दौरान कहा था कि उनकी पहली प्राथमिकता जिले को नक्सलमुक्त करना है। एसपी ने बचे हुए नक्सलियों को चेतावनी दी है। कहा- वे बिना शर्त सरेंडर करें, अन्यथा उनका भी यही हश्र होगा। इनकाउंटर जारी की सूचना पर डीजीपी का दौरा रद्द सारंडा में दूसरे दिन भी मावोवादी व पुलिस के बीच फायरिंग की सूचना के बाद डीजीपी झारखंड का दौरा रद्द कर दिया गया। संभवत: शनिवार को डीजीपी चाईबासा पहुंचेंगे। मारे गए नक्सलियों की लाशों को शुक्रवार को भी दिन में उठाया नहीं जा सका। देर शाम पांच बजे फायरिंग थमी तब कई ट्रैक्टर जंगल में घुसे हैं। संभावना है कि शनिवार सुबह तक लाशों को चाईबासा लाया जाएगा। नक्सली बुलबुल की मां बोली – गुजरात जाने की बात बोल 6 साल पहले घर से निकला था

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