बैंक मैनेजर, कैशियर पर धोखाधड़ी का केस:मृतक आश्रित को मिले 5 लाख रुपए, बिना अनुमति-अंगूठा निशान 2.50 लाख ई-मित्र संचालक के खाते में डाले

जोधपुर-नागौर रोड पर स्थित बावड़ी कस्बे के निकटवर्ती सांवत कुआं की रहने वाली एक युवती की वर्ष 2023 में आकस्मिक मृत्यु हो गई। इस पर युवती की मां बेबी पत्नी चंपाराम को मुख्यमंत्री चिरंजीवी योजना के तहत 27 दिसंबर को 5 लाख रुपए उसके खाते में जमा हुए। चंपादेवी का कहना है कि उसकी बिना सहमति, बिना अंगूठा निशान के बैंक मैनेजर, कैशियर और ई-मित्र संचालक ने साठगांठ कर ढाई लाख रुपए हड़प ई-मित्र वाले के खाते में डाल दिए। तब, पीड़िता ने उन तीनों को ही चेतावनी देते हुए रुपए लौटाने को कहा, लेकिन वे नहीं माने, तब उसने एफआईआर दर्ज करा दी। अब तीनों आरोपी हाथाजोड़ी कर केस वापस लेने का दबाव बना रहे हैं। खेड़ापा थाना पुलिस ने बताया – सांवत कुआं निवासी बेबी पत्नी चंपाराम की रिपोर्ट पर एफआईआर दर्ज की गई है। इसमें बताया कि उसकी बेटी सुमन की वर्ष 2023 में आकस्मिक मृत्यु हो गई थी। मुख्यमंत्री चिरंजीवी योजना के तहत सहायता राशि के लिए उसने ई-मित्र संचालक रामूराम से ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी कराई। 27 दिसंबर 2024 को बेबी के बावड़ी स्थित एसबीआई के खाते में सहायता राशि के रूप में 5 लाख रुपए जमा हुए। इससे पहले उसके खाते में सिर्फ 1076.92 रुपए ही बैलेंस था। अनसुलझा जवाब: 2.50 लाख ई-मित्र के खाते में कैसे गए? बेबी जाट की रिपोर्ट के अनुसार सहायता राशि जमा होने का पता चला तो वह बैंक से रुपए निकलवाने पहुंची। तब मैंनेजर ने कहा कि इतनी बड़ी राशि एक साथ नहीं मिल सकती है। तब, 27 दिसंबर को ही विथड्राल फार्म भरकर 50 हजार रुपए बेबी को दिए। इसी तरह 30 दिसंबर को भी 50 हजार रुपए खाताधारक ने निकलवाए। तब उसके खाते में 4,01,076.92 रुपए बैलेंस रहे। उसी दिन बैंक मैनेजर अंजित मिश्रा, कैशियर राकेश भाटी और रामसा ई-मित्र के संचालक बावड़ी निवासी रामूराम जाट पुत्र मोतीराम ने बिना बेबी की अनुमति के ही पीड़िता के खाते से 2.50 लाख रुपए निकाल लिए। अगले दिन 31 दिसंबर को बेबी दुबारा बैंक नकदी निकलवाने पहुंची, तब उसे मैनेजर ने बताया कि आपके खाते से ढाई लाख रुपए विड्रोल किए जा चुके हैं। खाते में सिर्फ 151076.92 रुपए ही शेष है। उसमें से 50 हजार रुपए निकलवा कर वो अपने घर पहुंची। न अनुमति दी, न ही अंगूठा निशान ही किया बेबी की रिपोर्ट के अनुसार उसके खाते से ढाई लाख रुपए निकालने के लिए उससे किसी ने कोई अनुमति नहीं ली और न ही उसने कहीं अंगूठा ही लगाया था। बैंक मैनेजर, कैशियर ने मिलीभगत करके ई-मित्र वाले के खाते में यह राशि डाली है। इसके लिए उलाहना देने पर बैंक मैनेजर ने खाली कागज पर अंगूठा लगवाने का प्रयास किया, लेकिन पीड़िता ने इससे मना कर दिया। तब पीड़िता को धमकाया गया। यहां रामूराम ने कहा कि इतने रुपए मैंने ही दिलवाए हें। इसमें से आधी राशि बैंक मैनेजर व मेरे हैं। इनके खिलाफ शिकायत की बात कहने पर आरोपियों ने पीड़िता के दामाद जेठाराम से संपर्क कर कहा कि आपकी सासू से एक वाउचर पर साइन करवाकर हमें दे दो, रुपए तो हमने निकाल लिए हैं। तब जेठाराम ने अपनी सास से संपर्क किया, लेकिन पीड़िता ने साइन या अंगूठा निशान करने से मना करते हुए पुलिस की शरण ली।

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