हिंदू महिलाओं के सबसे बड़े संगठन राष्ट्र सेविका समिति के 7 दिवसीय प्रारम्भिक प्रशिक्षण वर्ग का शुक्रवार को मण्डिया रोड स्थित ताड़केश्वर रामेश्वर सरस्वती बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय में समापन समारोह आयोजित हुआ। सात दिन तक चले प्रशिक्षण वर्ग में बहिनों ने शारीरिक, बौद्धिक आध्यात्मिक एवं योग, यष्टि, गणसमता, पदविन्यास, आचार पद्धति, विविध विषयों पर बौद्धिक चर्चाएं और खेलों के माध्यम से प्राप्त किए गए प्रशिक्षण का गुणवत्ता पूर्ण प्रदर्शन किया। वर्गाधिकारी कुमुद चौहान ने बताया की राष्ट्र सेविका समिति के 7 दिवसीय प्रारम्भिक प्रशिक्षण शिविर का आयोजन मंडिया रोड स्थित ताड़केश्वर रामेश्वर सरस्वती बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय में 29 दिसम्बर से शुरू हुआ। जिसमें पाली विभाग के 3 जिलों के खण्डों से 83 शिक्षार्थी, 13 शिक्षिकाएं, 5 प्रबंधिका, 5 अधिकारी ने भाग लिया। समापन समारोह कार्यक्रम का शुभारम्भ भारत माता की तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्वलित व पुष्प अर्पण कर किया गया। समारोह की अध्यक्षता प्रिया चौहान द्वारा की गई। मुख्य अतिथि विनिता कोका रही, मुख्य वक्ता के रूप में जालोर विभाग संचालिका नीलम पंवार का पाथेय मिला। समापन समारोह की अध्यक्षता करते हुए प्रिया चौहान ने कहा की देश व समाज की चिंता तो हर कोई करता है, सभी के पास बातें व योजनाएं भी रहती है। पर वास्तव में काम कितने लोग करते है यह एक बड़ा प्रश्न है। राष्ट्र सेविका समिति की शाखाओं व शिविरों में सेविकाएं राष्ट्र हित के लिए प्रत्यक्ष काम करना व उसके लिए कुशलता अर्जित करना यही प्रशिक्षण ग्रहण करती है। ये वर्ग महिलाओं के जीवन को नई दिशा और आधार प्रदान करते हैं। मुख्य अतिथि प्रोफेसर विनिता कोका ने कहा की ऐसे वर्ग महिलाओं को सशक्त बनाते हैं और उनमें सर्वश्रेष्ठ को सामने लाने में मदद करते हैं। जो महिलाएं अपनी वास्तविक क्षमताओं को पहचानती हैं, वे समाज को सही दिशा में ले जाती हैं। इसके लिए बहुत कुछ करने की जरूरत नहीं है, बस महिलाओं के लिए सही तरह की शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करना है। इसके बाद, महिलाएं अपने लिए सही निर्णय ले सकती हैं और अपने हितों की रक्षा कर सकती हैं। मुख्य वक्ता नीलम पंवार ने कहा कि राष्ट्र सेविका समिति हिंदू महिलाओं का सबसे बड़ा संगठन है। इसकी स्थापना 1936 में विजया दशमी के दिन लक्ष्मी बाई केलकर ने की थी। प्रशिक्षण वर्ग का उद्देश्य माता-बहिनों को खुद का संरक्षण खुद करने एवं सक्षम बनाना है। यहां महिलाएं सामाजिक समरसता, आत्मनिर्भरता, आत्मरक्षा और आत्मसम्मान जैसे गुणों के बारे में सीखती हैं। वर्ग में शारीरिक, मानसिक एवं बौद्धिक विकास होता है। उन्होंने बताया कि समित कई सेवा के कार्य करती है। जिसमें महिला छात्रावासों का संचालन, निःशुल्क चिकित्सा केंद्रों का संचालन, लघु उद्योग से जुड़े स्वयं सहायता समूहों का गठन, साहित्य केंद्रों एवं संस्कार केंद्रों का संचालन, जरुरतमंद बालिकाओं के लिए निःशुल्क ट्यूशन कक्षाओं का आयोजन करना आदि शामिल हैं। अंत में विभाग कार्यवाहिका अंजना सराफ ने सभी लोगों का धन्यवाद किया।


