शिव मंदिर को नोटिस दिया, प्रवर्तन अधिकारी निलंबित हुए:मंदिर की दीवार पर चस्पा कर 7 दिन में जवाब मांगा था, अवैध कब्जा माना था

जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) के भगवान शिव मंदिर के नाम नोटिस जारी करने के मामले में प्रवर्तन अधिकारी अरुण कुमार पूनिया को निलंबित कर दिया गया है। JDA सचिव निशांत जैन ने निलंबन आदेश जारी किए। इसमें बताया गया- निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार भत्ता मिलेगा। उनका मुख्यालय एडीजीपी (कार्मिक), राजस्थान, जयपुर के कार्यालय में निर्धारित किया गया है। दरअसल, वैशाली नगर क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण कार्य के दौरान JDA की टीम ने दुकानों और मकानों को अतिक्रमण मानते हुए नोटिस लगाए थे। इसी प्रक्रिया गांधी पथ पर भगवान शिव मंदिर को भी अवैध निर्माण की श्रेणी में डालकर नोटिस जारी कर दिया गया। इसमें सबसे विवादित पहलू यह रहा कि नोटिस किसी व्यक्ति या संस्था के नाम नहीं, बल्कि सीधे शिव मंदिर के नाम चस्पा किया गया था। नोटिस में 7 दिनों के भीतर जवाब देने के निर्देश लिखे थे। स्थानीय लोगों ने जताई थी नाराजगी इस कार्रवाई की जानकारी सामने आने पर स्थानीय नागरिकों में नाराजगी फैल गई थी। लोगों ने इस कदम का विरोध शुरू कर दिया था। सोशल मीडिया पर भी इस नोटिस की तस्वीरें वायरल हो गईं। विरोध बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने शुक्रवार को प्रारंभिक जानकारी के आधार पर प्रवर्तन अधिकारी अरुण कुमार पूनिया को जिम्मेदार मानते हुए तुरंत निलंबित कर दिया गया। सूत्रों के अनुसार धार्मिक आस्था से जुड़े किसी स्थान पर इस प्रकार नोटिस जारी करना प्रशासनिक प्रक्रियाओं की गंभीर चूक माना गया है। लोगों ने कहा था- मंदिर को नोटिस देना गलत स्थानीय निवासियों ने कहा कि मंदिर वर्षों से यहां मौजूद है और सड़क चौड़ीकरण का हवाला देकर मंदिर को नोटिस देना गलत था। लोगों का कहना था कि किसी धार्मिक स्थल पर नोटिस लगाने से पहले नियमों के अनुसार उचित संवाद और प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए थी। लेकिन जयपुर विकास प्राधिकरण के अधिकारियों ने ऐसा नहीं किया जो पूरी तरह गलत है। क्या कहा था नोटिस में जेडीए प्रवर्तन शाखा की ओर से चस्पा नोटिस में हाईकोर्ट की पिटीशन संख्या 658/2024 में पारित आदेश का हवाला दिया गया था। नोटिस के अनुसार कहा था कि गांधी पथ सड़क चौड़ीकरण से जुड़ी पीटी सर्वे रिपोर्ट जोन-7 के उपायुक्त से प्राप्त हुई है। इसी रिपोर्ट के आधार पर मंदिर की बाउंड्रीवॉल सड़क सीमा में 1.59 मीटर अंदर पाई गई, जिसे अतिक्रमण माना गया था। (पढ़ें पूरी खबर)

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