डीओपी सचिव हाईकोर्ट में पेश, कहा-16लाख का एरियर पास किया:कोर्ट ने पूछा-क्या अभियोजन स्वीकृति पुर्नविचार के लिए भेज सकते है

श्रम न्यायालय (लेबर कोर्ट) के आदेश की करीब 7 साल से पालना नहीं होने के मामले में आज हाईकोर्ट में डीओपी सचिव अर्चना सिंह पेश हुई। वहीं पीएचईडी के एसीएस ने हाजिरी माफी लगाई। जस्टिस गणेशराम मीणा की अदालत में पेश हुई डीओपी सचिव ने कहा कि पीएचईडी विभाग ने आदेश की पालना कर दी हैं। कर्मचारी को लेबर कोर्ट के आदेश के अनुसार 1982 से अर्द्ध सरकारी मानते हुए 16 लाख रुपए के एरियर पास कर दिया गया हैं। वहीं सालों तक आदेश की पालना नहीं करने वाले अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति जारी करने के श्रम आयुक्त के आदेश को लेकर उन्हें पुर्नविचार के लिए 2018 में ही लिखा गया था। जिस पर उनकी ओर से कोई जवाब नहीं आया। इसका याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सीपी शर्मा ने विरोध करते हुए कहा कि कानून में डीओपी विभाग को पुर्नविचार के लिए भेजने का अधिकार नहीं है। डीओपी को आरोपी अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृत जारी करनी चाहिए थी। इस पर कोर्ट ने डीओपी से पूछा-क्या अभियोजन स्वीकृति पुर्नविचार के लिए भेज सकते है? अब कोर्ट 12 दिसम्बर को मामले की सुनवाई करेगा। श्रम न्यायालय ने दिए थे अर्द्ध स्थायी के आदेश
अधिवक्ता सीपी शर्मा ने बताया- श्रम न्यायालय ने पीएचईडी विभाग में कार्यरत याचिकाकर्ता को व्हीकल ड्राइवर पद पर अर्द्ध स्थायी करने के आदेश 28 मार्च 2017 को दिए थे। लेकिन विभाग ने इसकी पालना नहीं की थी। इसके बाद याचिकाकर्ता ने औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा-29 के तहत श्रम आयुक्त के समक्ष प्रार्थना पत्र लगाया। इस पर निर्णय देते हुए श्रम आयुक्त ने 5 मार्च 2018 को आदेश की पालना नहीं होने पर कार्मिक विभाग को संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति जारी करने के आदेश दिए। 6 महीने की सजा और जुर्माने का प्रावधान
उन्होंने बताया कि श्रम आयुक्त के निर्णय के बाद भी आज तक कार्मिक विभाग ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति जारी नहीं की। जबकि औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा-29 की मंशा भी यही है कि अगर अधिकारी श्रम न्यायालय के आदेश की पालना नहीं करते हैं तो उन पर कार्रवाई की जाए। इसके अंतर्गत आदेश की पालना नहीं करने वाले अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति जारी होने पर उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलता है। इसमें 6 महीने की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।

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