बड़वानी जिले में केले की खेती करने वाले किसान इन दिनों भारी संकट का सामना कर रहे हैं। किसानों ने बताया कि बाजार में केले के बेहद कम दाम मिलने के कारण उन्हें अपनी लागत भी नहीं मिल पा रही है। मजबूरन, वे अपनी खड़ी फसल को उखाड़कर मवेशियों को खिलाने या खाद बनाने पर विवश हैं। अंजड़ क्षेत्र के ग्राम मोहीपुरा के केला उत्पादक किसान अपनी महीनों की मेहनत से तैयार फसल को अपने ही हाथों से खेतों से उखाड़कर फेंक रहे हैं, क्योंकि उन्हें बाजार में उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। लाखों लगाए, 2 रुपए प्रति किलो भाव मिल रहा किसान हीरालाल धनगर ने बताया कि उन्होंने 4 एकड़ जमीन में केले की फसल लगाई थी, जिस पर लाखों रुपए की लागत आई थी। हालांकि, बाजार में मिल रहे दाम इतने कम हैं कि वे लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं। किसान के अनुसार, व्यापारी केले खरीदने को तैयार नहीं हैं और उन्हें महज 2 रुपए प्रति किलो का भाव मिल रहा है, जो अपमानजनक है। मवेशियों को खिला रहे फसल धनगर ने बताया कि उचित दाम न मिलने के कारण उन्हें एक खेत की पूरी फसल को कटर मशीन से काटकर मवेशियों को खिलाना पड़ा। उन्होंने कहा कि उनकी पूरी फसल तैयार खड़ी थी, लेकिन कोई खरीदार नहीं आया, जिससे उनकी मेहनत और पैसा बर्बाद हो गया। डॉलर चना बोने की तैयारी प्रति एकड़ लगभग डेढ़ लाख रुपए का खर्च आया है, जबकि केला 2 रुपए प्रति किलो बिक रहा है और उत्पादन लागत 5 से 6 रुपए प्रति किलो है। घर खर्च और लागत निकालने के लिए अब वे एक खेत में लगे केले को हटाकर डॉलर चना बोने की तैयारी कर रहे हैं।


