आगर मालवा में मां बगलामुखी मंदिर परिसर की भूमि से दो दशक पुराना कब्जा हटा दिया गया है। उच्च न्यायालय के फैसले के बाद प्रशासन ने यह कार्रवाई की। हाईकोर्ट ने शुक्रवार को सुनाए अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि यह विवादित भूमि मूर्ति श्रीराम मंदिर की है और 1997 में फर्जी तरीके से ली गई डिक्री अवैध थी। रात में ही विवादित दुकानों को हटाया उच्च न्यायालय का आदेश मिलते ही शुक्रवार शाम को जिला प्रशासन सक्रिय हो गया। रात में ही मंदिर परिसर से सटी विवादित दुकानों को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई। शनिवार सुबह तक लोगों ने अपनी दुकानों का मलबा हटाना शुरू कर दिया था। इसके बाद प्रशासन ने कब्जा मुक्त की गई भूमि पर सभी सर्वे नंबरों का उल्लेख करते हुए एक बड़ा बोर्ड लगाया। इस बोर्ड पर स्पष्ट लिखा है कि यह भूमि अब प्रशासन/मूर्ति श्रीराम मंदिर के कब्जे में है। प्रशासन के सुपुर्द की जमीन कलेक्टर प्रीति यादव ने बताया कि उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार भूमि को कब्जा मुक्त कर प्रशासन के सुपुर्द कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि यह भूमि मंदिर के उपयोग और संरक्षण के लिए ही निर्धारित की जाएगी। भविष्य में किसी भी अवैध कब्जे या दावे पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। अतिरिक्त महाधिवक्ता आनंद सोनी ने अंतिम सुनवाई में सरकार के पक्ष में मजबूत तर्क प्रस्तुत किए थे। इन्हीं तर्कों के आधार पर हाईकोर्ट ने शुक्रवार को दो दशक पुराने इस विवाद का अंत करते हुए सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया। फैसले के अगले ही दिन शनिवार को प्रशासन ने पूरी भूमि पर अपना अधिकार स्थापित कर लिया।


