गुमला|कार्तिक उरांव महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डॉ. बीएन मिश्रा को महाविद्यालय परिवार, शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की ओर से सेवानिवृत्ति विदाई दी गई। विदाई समारोह में मिश्रा अपनी पत्नी जयश्री नंदा और पुत्र प्रियांशु के साथ महाविद्यालय पहुंचे थे। कालेज के कांफ्रेंस हाल में विदाई समारोह का आयोजन किया गया। जहां बीएड संकाय और कॉलेज के शिक्षक व कर्मचारियों ने उपहार, अंग वस्त्र और पुष्प गुच्छ देकर भावभीनी विदाई दी और शेष जीवन के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। मिश्रा ने कहा कि कार्तिक उरांव कालेज गुमला के साथ जुडे यादें हमेशा यादगार रहेगा। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्ति नौकरी का एक हिस्सा है। 40 वर्षों तक मैंने पढ़ाने का काम किया है। हर काम का एक समय सीमा होता है। विश्व विद्यालय में सीनियर के बावजूद मुझे कभी पद की लालसा नहीं रही। मैने ईमानदारी पूर्वक अपना दायित्व का निर्वहन किया हैं। मौके पर पूर्व प्राचार्य डॉ. सतीश गुप्ता, बीएड संकाय के डॉ. राकेश कुमार, डॉ. मंती, नीलम मिंज, डॉ. अली, डॉ. अजीत हांसदा, डॉ. आशुतोष कुमार, डॉ. प्रसन्नजीत मुखर्जी, कर्मचारी चरण उरांव आदि ने अपने-अपने विचार व्यक्त करते हुए डॉ. बीएन मिश्रा के कार्यकाल और व्यक्तित्व की प्रशंसा की। उनके व्यवहार कुशलता और संवाद के तरीके को प्रेरणा स्रोत बताया। लोहरदगा|ऑक्सब्रिज स्कूल हिरही में रविवार को धूमधाम से प्रथम वार्षिकोत्सव मनाया गया। जिसमें मुख्य अतिथि डायरेक्टर ऑक्सब्रिज स्कूल मांडर रांची तौफीक आलम, विशिष्ट अतिथि हेड ऑफ डिपार्टमेंट संस्कृत विनोबा भावे विश्वविद्यालय हजारीबाग डा अंजुम आरा, विशेष अतिथि प्रधानाध्यापिका ऑक्सब्रिज स्कूल मांडर रांची इवोन एवेंजलिन एक्का उपस्थित रहे। वहीं सभी अतिथियों को पौधा देकर और शॉल ओढ़कर स्वागत किया गया। जिसके बाद छोटे छोटे बच्चों ने एक से बढ़कर एक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। वहीं मुख्य अतिथि ने कहा कि आज का दिन विद्यालय के लिए ऐतिहासिक दिन है। स्कूल क्या होता है और कैसा होना चाहिए कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों से सभी चीजों को समेट कर रख दिया। आपने महसूस किया होगा कि किसी भी बच्चे में झिझक नहीं है यह भी एजुकेशन का हिस्सा है। विज्ञान कहां से कहां पहुंच गया है और इस विज्ञान का लाभ हम ले रहें हैं लेकिन इसका नुकसान भी उठाना पड़ेगा। शिक्षकों का प्रयास होता है कि वे बच्चों को अच्छी शिक्षा दें। बच्चों को केवल शिक्षा देना काफी नहीं है उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना आवश्यक है। विशिष्ट अतिथि ने कहा कि आज का दिन उत्सव का ही नहीं बल्कि आपकी मेहनत और उपलब्धियों का प्रमाण है।


