शाजापुर में सोमवार को गीता जयंती के पावन अवसर पर गीता जयंती महोत्सव का आयोजन किया गया। यह महोत्सव प्रशासन की ओर से गायत्री शक्तिपीठ मंदिर परिसर में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया।कार्यक्रम में भाजपा के कार्यकर्ता, पदाधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी, गायत्री परिवार के सदस्य, पंडित और स्कूली छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। महोत्सव के दौरान गायत्री परिवार और पंडितों के मार्गदर्शन में छात्रों तथा अन्य उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से मंत्रोच्चारण किया। इससे पूरे परिसर में आध्यात्मिक वातावरण निर्मित हुआ। वक्ताओं ने युवाओं और विद्यार्थियों से गीता के संदेशों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि इसी दिन कुरुक्षेत्र की रणभूमि में महाभारत युद्ध के दौरान भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को श्रीमद्भगवद् गीता का उपदेश दिया था। वक्ताओं ने गीता के संदेश को धार्मिक दृष्टि के साथ-साथ जीवन प्रबंधन, नेतृत्व, कर्मयोग और समस्याओं के समाधान के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भगवद् गीता को विश्वभर में प्रबंधन, नेतृत्व और जीवन मूल्यों के लिए सर्वोत्तम ग्रंथ माना जाता है। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने गीता के संदेशों को आत्मसात करने और समाज में सद्भाव एवं नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने का संकल्प लिया। युवाओं और विद्यार्थियों से श्रीमद्भगवद्गीता के उपदेशों को अपने दैनिक जीवन में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गीता कर्म, अनुशासन और सकारात्मक सोच का मार्गदर्शन करती है। इसके संदेश जीवन की चुनौतियों का सामना करने की शक्ति देते हैं। वक्ताओं ने बताया कि गीता से प्रेरणा लेकर युवा सही दिशा में आगे बढ़ सकते हैं और समाज व राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभा सकते हैं।


