: निस्वार्थ कर्म का संदेश गीता मानव कल्याण का श्रेष्ठ ग्रंथ: SP अमित कुमार का संबोधन गीता जयंती पर ज्ञानोत्सव, छात्रों ने रखे विचार—प्रतियोगिता का भी आयोजन गीता तनाव मुक्त करती है, जीवन मूल्यों का आधार: विशेषज्ञों ने कहा गीता अध्ययन से मिलता है कर्तव्य और सत्य का मार्ग—अध्यक्ष प्रो. मीणा झालावाड़ के राजकीय पीजी कॉलेज में सोमवार को गीता जयंती बड़े उत्साह के साथ मनाई गई। कार्यक्रम का आयोजन संस्कृत विभाग व भारतीय ज्ञान परंपरा के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य प्रोफेसर राम कल्याण मीणा ने की, जबकि मुख्य अतिथि पुलिस अधीक्षक अमित कुमार थे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्राचार्य प्रो. राम कल्याण मीणा ने कहा कि गीता मानव जीवन के कल्याण का श्रेष्ठतम मार्गदर्शक ग्रंथ है, जो जीवन में संतुलन, कर्म और आत्मज्ञान का संदेश देती है। मुख्य अतिथि एसपी अमित कुमार ने विद्यार्थियों को बिना फल की इच्छा किए निस्वार्थ भाव से कर्म करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि मनुष्य का अधिकार केवल कर्म करने पर है, परिणाम पर नहीं, इसलिए पूरी निष्ठा और मन से लक्ष्य की ओर प्रयास करना चाहिए। संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. अलका बागला ने बताया कि गीता भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य वाणी है, जो हजारों वर्षों से भारतीय दर्शन, अध्यात्म और जीवन मूल्यों का आधार रही है। डॉ. ओम प्रकाश बैरवा ने कहा कि गीता मनुष्य को तनाव मुक्त करती है और जीवन की कठिन परिस्थितियों से उबरने का बल देती है।वहीं डॉ. अशोक कंवर शेखावत ने बताया कि गीता मनुष्य को सत्य, कर्तव्य और शांति के मार्ग पर अग्रसर करती है। कार्यक्रम में संस्कृत परिषद की छात्राओं चंदा राठौर व भाग्यश्री ने भी अपने विचार व्यक्त किए।आयोजन के बाद गीता सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता करवाई गई, जिसमें बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।


