बालाघाट जिला अस्पताल में सोमवार को वारासिवनी क्षेत्र की झरना डहरवाल के गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई। परिजनों ने समय पर ऑपरेशन नहीं होने का आरोप लगाया है। पिछले 20 दिनों में यह दूसरी ऐसी घटना है, जिसमें जिला अस्पताल में लापरवाही के चलते गर्भ में शिशु की जान गई है। प्रसूता को ऑपरेशन थिएटर से लौटाया परिजनों ने बताया कि झरना डहरवाल को सोमवार तड़के 4-5 बजे के बीच प्रसव पीड़ा और भारी ब्लीडिंग के बाद जिला अस्पताल लाया गया। आशा कार्यकर्ता अनिता जामुनपाने और परिवार ने डॉक्टर से तुरंत ऑपरेशन करने की मांग की। लेकिन, ड्यूटी पर मौजूद महिला डॉक्टर रश्मि बाघमारे ने अपनी ड्यूटी खत्म होने का हवाला देते हुए प्रसूता को ऑपरेशन थिएटर से ही वापस लौटा दिया। आशा कार्यकर्ता ने आरोप लगाया कि डॉक्टर ने उनके साथ अभद्र व्यवहार भी किया। दूसरे डॉक्टर ने किया ऑपरेशन, तब तक शिशु की मौत कुछ देर बाद जब दूसरी डॉक्टर ने ऑपरेशन किया, तब तक गर्भस्थ शिशु की मौत हो चुकी थी। घटना के बाद परिवार के सदस्यों में आक्रोश है। उनका कहना है कि अगर समय पर ऑपरेशन हो जाता, तो बच्चे की जान बच सकती थी। 20 दिन में दूसरी घटना बता दें कि, इससे पहले भी 11 नवंबर को भी किरनापुर क्षेत्र की गर्भवती महिला किरण डोंगरे के मामले में समय पर ऑपरेशन न होने से गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई थी। उस मामले में डॉ. गीता बारमाटे पर कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित किया गया था। जिला अस्पताल में व्यवस्था पर सवाल लगातार दो मामलों ने जिला अस्पताल की प्रसूति सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में लापरवाही की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिसके कारण मरीज सरकारी अस्पतालों पर भरोसा खो रहे हैं और मजबूर होकर निजी अस्पतालों का रुख कर रहे हैं। परिजन और आशा कार्यकर्ता घटना की उचित जांच और कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। सीएचएमओ बोले- अस्पताल लाने से पहले हुई मौत मामले में बालाघाट के सीएचएमओ डॉ. परेश उपलप ने कहा कि वे इस समय शहर से बाहर हैं और लौटकर मामले की जांच कराएंगे। उन्होंने बताया कि जब महिला को अस्पताल लाया गया था, तब तक गर्भ में शिशु की मौत हो चुकी थी।


