छतरपुर जिला अस्पताल में एक दंपती ने डॉक्टर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। दंपती का कहना है कि महिला के साथ अभद्रता की, धक्का-मुक्की की और सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया। यह मामला सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के जिला अस्पताल का है। ग्राम कलानी निवासी अभिषेक मिश्रा 20 नवंबर को अपनी पत्नी रोशनी मिश्रा को पेट में तेज दर्द की शिकायत के साथ अस्पताल लाए थे। अस्पताल के कमरा नंबर 28 में पदस्थ डॉ. मुकेश दांगी ने पथरी की आशंका जताते हुए अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी। रोशनी ने जिला अस्पताल में तीन बार अल्ट्रासाउंड कराया, लेकिन हर बार रिपोर्ट में कोई समस्या नहीं पाई गई। लगातार बढ़ते दर्द और सही निदान न मिलने से परेशान अभिषेक ने एक निजी क्लिनिक में 900 रुपए खर्च कर अल्ट्रासाउंड कराया। निजी रिपोर्ट में रोशनी के पित्ताशय में 9 एमएम की पथरी और लीवर से संबंधित समस्या सामने आई। विरोध करने पर अभद्र भाषा का उपयोग किया
अभिषेक का आरोप है कि जब वे निजी रिपोर्ट लेकर डॉ. दांगी के पास पहुंचे, तो डॉक्टर ने अस्पताल की मशीन खराब होने का हवाला देकर इलाज करने से इनकार कर दिया और उन्हें भोपाल जाने की सलाह दी। विरोध करने पर डॉ. दांगी ने कथित तौर पर अभद्र भाषा का प्रयोग किया और कहा, “कौन सा दलाल बाहर अल्ट्रासाउंड कराने ले गया था, पथरी थी तो क्या तुम मर रही थी।” पीड़ित दंपती का दावा है कि डॉक्टर ने रोशनी को धक्का देकर कमरे से बाहर निकाल दिया। अभिषेक ने पहले ही 181 (सीएम हेल्पलाइन) पर इस मामले की शिकायत दर्ज कराई थी। दंपती का आरोप है कि इसके बाद डॉक्टर और अस्पताल स्टाफ उन पर शिकायत वापस लेने का दबाव बना रहे हैं और शिकायत न लेने पर झूठी रिपोर्ट दर्ज कराने की धमकी भी दे रहे हैं। 3 दिसंबर को जब दंपती शिकायत दर्ज कराने सिटी कोतवाली पहुंचा, तो थाना प्रभारी ने रिपोर्ट दर्ज करने की बजाय उन्हें सिविल सर्जन का मोबाइल नंबर दे दिया। पीड़िता रोशनी ने डॉ. मुकेश दांगी के निलंबन की मांग की है। वहीं, जिला अस्पताल की सिविल सर्जन शरद चौरसिया ने इस मामले पर कहा कि महिला ने 181 पर शिकायत की थी, जिसके बाद उन्हें कई बार बुलाया गया, लेकिन वे नहीं आईं। सिविल सर्जन ने यह भी आरोप लगाया कि महिला ने डॉक्टर के साथ अभद्रता की थी, जिसकी शिकायत अस्पताल द्वारा की जाएगी।


