जनजातीय समाज की संस्कृति व परंपरा ने समाज को दी नई दिशा

कांकेर| शासकीय शिक्षक शिक्षा महाविद्यालय कांकेर में एक दिवसीय जनजातीय समाज का गौरवशाली अतीत विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में राज्य अलंकरण सम्मान 2025 से सम्मानित शेरसिंह ऑचला एवं मुख्य वक्ता सेवानिवृत्त अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गोरखनाथ बघेल थे। अतिथियों का स्वागत संस्था के छात्राध्यापकों ने छत्तीसगढी वेशभूषा में नृत्य के साथ किया। कार्यशाला को संबोधित करते शेरसिंह ऑचला ने कहा जनजातीय समाज की संस्कृति परम्परा ने समाज व देश को नई दिशा दी। भारत को स्वतंत्रता दिलाने में वीर सपूतों ने अपने तन-मन धन का न्योछावर किया। सीधे व सरल स्वाभाव के जनजातीयों में प्रकृति पूजा के द्वारा लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक किया। मुख्य वक्ता गोरखनाथ बघेल ने बिरसामुंडा की 150 वीं जयंती पर उनको नमन करते अंग्रेजों के विरूद्ध किए गए संघर्ष व शहादत के बारे मे जानकारी दी। तिल्का मांझी, गैदसिंह जमीदार, रानी दुर्गावती आदि जनजाति वीरों के बारे में विस्तारपूर्वक बताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के प्राचार्य डॉ. ओपी मिश्रा ने करते अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया। सहायक प्राध्यापक डॉ. रामरूद्र गिरि ने अंत में आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में संस्था के समस्त सहायक प्राध्यापको, कर्मचारियों एवं छात्राध्यापकों का योगदान रहा।

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