राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव शशि गजराना ने तीसरी बार परिवहन व ट्रैफिक पुलिस के साथ बालवाहिनियों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान बाल वाहिनियों में कमियां मिलने पर सचिव ने नाराजगी जताते हुए संबंधित स्कूल प्रशासन को सख्त निर्देश दिए और बालवाहिनियों में मिली कमियों को तुरंत दुरुस्त करने के आदेश दिए। उन्होंने कहा कि बाल वाहिनियों में स्कूल जाने वाले बच्चों की जान से कोई समझौता नहीं होगा। सचिव गजराना ने सबसे पहले लाला कमलापत सिंघानिया एज्यूकेशन सेंटर झालावाड़ की बाल वाहिनियों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान स्कूल की किसी भी बाल वाहिनी के पीछे स्कूल का नाम, पता, फोन नंबर, ड्राइवर व सहायक का नाम नहीं लिखा हुआ था। इसके अलावा बालवाहिनी में इमरजेंसी गेट सही नहीं मिला, उससे बच्चों को गिरने का खतरा था। इसी प्रकार एक अन्य स्कूल आदर्श विद्या मंदिर झालरापाटन की बाल वाहिनियों का भी निरीक्षण किया गया। इसमें बहुत ज्यादा कमियां मिली। इमरजेंसी गेट को लोहे की चादर से बंद किया हुआ था। इसके अलावा और भी कई कमियां मिली। निरीक्षण में ट्रैफिक पुलिस की ओर से एएसआई आशीष कुमार, एएसआई लेखराज, आशुलिपिक राजेंद्र सिंह, कनिष्ठ सहायक अंकित शर्मा एवं कमलेश कुमार उपस्थित रहे। विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव गजराना ने कमलापत सिंघानिया एज्यूकेशन सेंटर की बाल वाहिनी का निरीक्षण किया तो उसका इमरजेंसी गेट को पूरी तरह लोहे की चादर लगाकर बंद कर रखा था। ऐसे में बस में कोई हादसा हुआ तो बच्चें इमरजेंसी गेट से बहर कैसे निकलेंगे। सचिव ने तुरंत गेट को ठीक करवाने के निर्देश दिए। इसके अलावा एक अन्य बाल वाहिनी में इमरजेंसी गेट सही नहीं था जिसे बच्चे आसानी से खोल सकते हैं उस गेट को तुरंत सही करवाने के आदेश दिए। परिवहन विभाग को उपलब्ध करवानी होगी रूट चार्ट की प्रति परिवहन इंस्पेक्टर बनवारीलाल लोदिया ने बताया कि समस्त स्कूल संचालक बाल वाहिनियों के रूट चार्ट की एक प्रति परिवहन विभाग को भी आवश्यक रूप से उपलब्ध कराएगा। स्कूल प्रशासन बाल वाहिनियों के संचालन की व्यवस्थाओं को सुचारू रखने के लिए एक समिति का गठन करें, जिसके माध्यम से समय-समय पर वाहन चालकों, सहायकांे को वाहन संचालन में ध्यान रखे जाने वाले नियम कानूनों के बारे में बताया जाए। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को कई वाहनों में सीट बेल्ट सुचारू रूप से व्यवस्थित नहीं थी, कुछ वाहनों में पीली स्ट्रिप नहीं थी, कुछ में कैमरे खुल हुए थे जिन्हें मौके पर लगवाए गए, जिनका चालान बनाया गया। कुछ स्कूलों की बाल वाहिनियां कैमरे, प्राथमिक चिकित्सा पेटी, अग्निशमन यंत्र, जीपीएस सिस्टम नहीं थे। एक वाहन का इमरजेंसी गेट वेल्डिंग से पूरी तरह से बंद किया हुआ था। एक वाहन का पीयूसी नहीं था, जिसका मौके पर चालान किया गया।


