राजस्थान में इस साल अच्छे मानसून से प्रदेश के सभी बड़े बांध लबालब हैं। कई बांधों के आसपास मौजूद प्राकृतिक टापू-पहाड़ियां अब तक जलमग्न ही हैं। ऐसा ही एक स्थान है पाली जिले में देवगिरी की ऐतिहासिक पहाड़ी। मान्यता है कि द्वापर युग यहां पांडव भी आए थे। जवाई बांध भरने के बाद से ये पहाड़ी पानी से घिर जाती है। इस कारण यहां रहने वाले 300 लंगूरों के लिए हर साल जीने-मरने का संकट पैदा हो जाता है। इन लंगूरों को बचाने के लिए आसपास के गांवों से हर साल 2 लाख रुपए की फल-सब्जियां यहां पहुंचाई जाती हैं। एक बार में 100 किलो खाना लेकर पहुंचते हैं बंदर भूखे न रहें, इसके लिए ग्रामीण और वन्यजीव प्रेमी हर दूसरे दिन पहाड़ी पर करीब 100 किलो खाना लेकर जाते हैं। इनमें केले, आलू, सेब, चने, बिस्किट, मूंगफली और गेहूं शामिल हैं। बाली उपखंड के सेणा गांव में स्थित इस क्षेत्र में लगभग हर साल 4 महीने इसी तरह के हालात रहते हैं। सेणा के अलावा बांध के पास स्थित जीवंदा, दुदुनी, मोरी, कोठार गांव के लोग भी यहां बंदरों के लिए खाना लेकर पहुंचते हैं। लंगूरों के लिए हर साल जमा किया जाता है चंदा मोरी गांव निवासी नाथू सिंह ने बताया- जवाई बांध 55 फीट भरने के बाद देवगिरी पहाड़ी का रास्ता बंद हो जाता है। यहां हर साल करीब 300 से 400 बंदर फंस जाते हैं। साल 1996 से यहां ऐसे हालात हर साल बनते है। सरकार से बंदरों के लिए हमें कोई सहयोग नहीं मिलता है। बंदरों को खाना देने के लिए हर साल गांव-गांव से चंदा लिया जाता है। मुंबई, सूरत जैसे बड़े शहरों के भामाशाहों से भी सहयोग लिया जाता है। बंदरों के खाने के लिए बना रखा है गोदाम भामाशाहों के सहयोग से अभी गोदाम में 50 क्विंटल गेहूं के अलावा मूंगफली भरी हुई है। भामाशाह बिस्किट, चने के अलावा आलू,सेब, मूंगफली, ककड़ी, केले पिकअप-रिक्शा में भेजते हैं। हर साल शिवगंज मंडी से 2 लाख रुपए की सब्जियां और फल खरीदकर बंदरों को खिलाए जाते हैं। टापू पर पहुंचने में लगता है सवा घंटा ग्रामीण नाथू सिंह ने बताया- नाव छोटी है इसलिए सामान लेकर जाने में करीब सवा घंटे का समय लग जाता है। इस तरह वह खाना देकर आने के लिए 4 किलोमीटर नाव चलानी पड़ती है। करीब 3.30 घंटे आने-जाने में लगते हैं। नाथू सिंह ने बताया कि साल 2002 में लोगों के सहयोग से बंदरों को ड्रमों में भरकर पहाड़ी से बाहर निकाला था। 6 सितंबर को खुले थे बांध के गेट सेणा निवासी हेमराज ने बताया- पिछले 3 महीने से पहाड़ी के चारों तरफ पानी भरा हुआ है। बांध के गेट 6 सितंबर को खुले थे। बांध की भराव क्षमता 61.25 फीट है। जवाई बांध से पीने और सिंचाई के लिए पानी सप्लाई हो रहा है। जनवरी तक पानी पहाड़ी के चारों तरफ भरा रहेगा। जैसे ही पानी का लेवल 55 फीट के पास आएगा, पहाड़ी का रास्ता भी खुल जाएगा। ऐतिहासिक है देवगिरी पहाड़ी इस पहाड़ी पर देवगिरी माताजी का प्राचीन मंदिर भी है। पानी के कारण ग्रामीण बहुत कम संख्या में दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पहाड़ी ऐतिहासिक है। आऊवा ठाकुर कुशाल सिंह इसी देवगिरी पहाड़ी पर कुछ समय छिपे रहे। मान्यता यह भी है कि पांडवों ने अपना अज्ञातवास का कुछ समय यहां भी बिताया था।


