एजुकेशन रिपोर्टर | रांची रांची यूनिवर्सिटी से एफिलिएटेड मौलाना आजाद कॉलेज में दो विषयों के असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर पांच अभ्यर्थियों को नियुक्त किया गया है। इनमें उर्दू के तीन और इतिहास विषय के दो असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। उर्दू रिसर्च स्कॉलर्स एसोसिएशन (यूआरएसए) ने अंजुमन प्लाजा के मुसाफिरखाना में रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नियुक्ति में नियम की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। एसोसिएशन के मो. इकबाल, तनवीर मजहर, शगुफ्ता बानो और आसमा परवीन ने कहा कि मौलाना आजाद कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति के लिए 2016, 2019 और 2022 में विज्ञापन निकाले गए थे। वर्ष 2022 के विज्ञापन में अभ्यर्थियों ने आवेदन के साथ 500 रुपए शुल्क भी जमा किया था। लेकिन, बिना एकेडमिक परफॉर्मेंस इंडेक्स (एपीआई) जारी किए ही मौलाना आजाद कॉलेज कमेटी ने पांच अभ्यर्थियों को असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर चयन कर लिया। अन्य पदों पर भी नियुक्ति की तैयारी चल रही है। एसोसिएशन ने कहा कि नियुक्ति में नियम की अनदेखी के संबंध में मौलाना आजाद कॉलेज के प्रिंसिपल और रांची विवि के वीसी को पत्र भेजकर जानकारी दी गई थी। इतना ही नहीं जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष से मिलकर इस ओर उनका ध्यान आकृष्ट कराया गया था। लेकिन, पैरवी और पहुंच के आधार पर जेपीएससी व आरयू सिंडिकेट ने मौलाना आजाद कॉलेज द्वारा की गई नियुक्तियों पर मुहर लगा दी। नियुक्ति का विज्ञापन भी ऐसे अखबार में प्रकाशित किया गया, जिसे अधिकतर लोगों ने देखा ही नहीं। कहा कि गलत ढंग से की गई नियुक्तियों को शीघ्र रद्द नहीं किया गया, तो हाईकोर्ट से न्याय की गुहार लगाएंगे।


