विद्युत वितरण कंपनी कर रही निजता का हनन:बिजली चोरी रोकने के नाम पर 65 लाख उपभोक्ताओं के घर की लोकेशन व फोटो तक सार्वजनिक कर दिए

भास्कर एक्सपर्ट – अनुराग श्रीवास्तव, प्रदेश सरकार के रिटायर्ड एडिशनल सेक्रेटरी मप्र पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने बिजली चोरी पकड़ने के लिए बनाए वी-मित्र एप पर 65 लाख उपभोक्ताओं का पूरा डाटा इंटरनेट पर सार्वजनिक कर दिया है। कंपनी की वेबसाइट पर कंज्यूमर डाटाबेस से बिना किसी सुरक्षा, लॉगिन या OTP के उपभोक्ता का नाम, पता, मोबाइल, घर की लोकेशन व फोटो तक देखे जा सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह डिजिटल व्यक्तिगत डाटा संरक्षण (डीपीडीपी) अधिनियम 2023 का उल्लंघन है। जुलाई 2025 में कंपनी ने वी-मित्र एप लॉन्च किया था। एप के जरिए 4 करोड़ रुपए से ज्यादा की बिजली चोरी पकड़ी जा चुकी है, लेकिन इसी में कंपनी ने उपभोक्ताओं का डाटाबेस भी सार्वजनिक कर दिया है। यह जानकारी सामान्यतः केवल कंपनी के सतर्कता विभाग (उड़नदस्ता) के लिए होती है। सिर्फ जरूरी डाटा रखने का सीमित अधिकार
सहमति जरूरी : भारतीय डाटा गोपनीयता कानून डिजिटल व्यक्तिगत डाटा संरक्षण (DPDP) अधिनियम, 2023 और DPDP नियम, 2025 के अनुसार, किसी संगठन को किसी भी व्यक्ति का व्यक्तिगत डाटा संग्रहित या सार्वजनिक करने से पहले स्पष्ट सहमति लेनी जरूरी है। साइबर अपराधियों के लिए फायदेमंद
उपभोक्ताओं के पते, घर की सटीक लोकेशन और फोटो सार्वजनिक होने से सुरक्षा जोखिम है। डाटा का दुरुपयोग संभव है, कानून में भारी दंड का प्रावधान है। साइबर फ्रॉड करने वालों के लिए आईवीआरएस का डाटा भी महत्वपूर्ण है, जिससे 65 लाख लोगों का डाटा सीधे अपराधियों तक पहुंच सकता है। सीधी बात – अनय द्विवेदी, एमडी, मप्र पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ओटीपी अनिवार्य कर देंगे 65 लाख उपभोक्ताओं का डाटा सार्वजनिक कर दिया?
हमने इलेक्ट्रिसिटी एक्ट के तहत डाटा जारी किया है। सिर्फ आधार, पैन सहित अन्य डाटा ही पर्सनल डाटा माना जाता है, हमने लीगल राय लेकर ही ऐसा किया। डाटा नेट पर उपलब्ध होने से खतरा हो सकता है?
सरकार की आपत्ति के बाद नाम हटा दिए हैं, सिर्फ लोकेशन, पता व कनेक्टेड लोड ही दिख रहा है। बिना ओटीपी डाटा मिल रहा?
सिक्योरिटी की एक और लेयर बढ़ाते हुए ओटीपी अनिवार्य कर देंगे।

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