चित्तौड़गढ़ से निर्दलीय विधायक चंद्रभानसिंह आक्या की जीत को दो साल से ज्यादा का समय हो चुका है, लेकिन उनके समर्थकों की आस्था और उत्साह अब भी कम नहीं हुआ है। सोमवार को उनके समर्थक और सांवलियाजी निवासी रामेश्वर उर्फ रामू गुर्जर ने अपनी मन्नत पूरी करते हुए घर से श्री सांवलियाजी मंदिर तक लोटन यात्रा की। उन्होंने कहा कि दो साल बाद उनका यह मनोकामना पूरी होना भी भगवान सांवलिया सेठ की कृपा है। मंदिर पहुंचकर विधायक आक्या को 95 किलो सिक्कों से तौला गया और ये सभी सिक्के बाद में भगवान के भंडार में चढ़ाए गए। इस पूरे आयोजन के दौरान माहौल बेहद उत्साहपूर्ण रहा और बड़ी संख्या में भक्तों ने भाग लिया। आस्था से जुड़ा दो साल पुराना संकल्प पूरा रामेश्वर गुर्जर ने बताया कि विधानसभा चुनाव के समय चंद्रभानसिंह आक्या का भाजपा से टिकट कट गया था। उस समय पार्टी बदलना, निर्दलीय चुनाव लड़ना और जनता का समर्थन जुटाना, सब कुछ एक तरह से चुनौतीपूर्ण था। लेकिन रामेश्वर को विश्वास था कि भगवान सांवलिया सेठ की कृपा से आक्या जरूर जीतेंगे। उन्होंने उसी समय मन में संकल्प किया था कि अगर आक्या जीतकर विधायक बनते हैं तो वे अपने घर से मंदिर तक लोटन यात्रा करेंगे। दो साल तक कई बार प्रयास करने के बाद इस बार उनका यह संकल्प पूरा हुआ। ढोल–नगाड़ों और महिलाओं के नृत्य के साथ यात्रा लोटन यात्रा के दौरान ग्रामीण परंपरा और उत्साह साफ नजर आया। ढोल और बैंड पार्टी यात्रा के साथ चल रहे थे। महिलाएं रास्ते भर नाचते हुए सांवलियाजी मंदिर तक पहुंचीं। लोटन यात्रा करने वाले रामू गुर्जर को रास्ते भर भक्तों ने पानी, फल और ऊर्जा देने वाली चीजें पहुंचाईं। मंदिर प्रांगण में प्रवेश करते समय भक्तों की भीड़ उन्हें देखने के लिए उमड़ पड़ी। मंदिर प्रशासन ने भी पूरी व्यवस्था संभाली और यात्रा शांतिपूर्ण माहौल में पूरी हुई। विधायक को 95 किलो सिक्कों से तौला गया मंदिर पहुंचने के बाद विधायक चंद्रभानसिंह आक्या का सिक्कों से तौलना सबसे खास आकर्षण था। करीब 95 किलो सिक्कों का वजन निकला, जिन्हें बाद में भगवान सांवलिया सेठ के चरणों में समर्पित कर दिया गया। तौल समारोह के दौरान श्री सांवलियाजी मंदिर बोर्ड अध्यक्ष हजारीदास वैष्णव, अशोक रायका सहित कई गणमान्य लोग मौजूद थे। इस अनोखी परंपरा को देखने के लिए भक्त भी बड़ी संख्या में इकट्ठे हुए। चांदी का कुकर चढ़ाकर जताई श्रद्धा इसके अलावा रामू गुर्जर ने मंदिर में आधा किलो वजनी चांदी का कुकर भी चढ़ाया। इसका विशेष कारण यह था कि निर्दलीय चुनाव लड़ते समय चंद्रभानसिंह आक्या का चुनाव चिन्ह ‘कुकर’ था। रामू का कहना था कि चुनाव चिन्ह उनकी जीत की पहचान बन चुका है और उसी की याद में उन्होंने चांदी का कुकर भगवान को अर्पित किया। यह दृश्य देख वहां मौजूद श्रद्धालु भी भावुक हो गए। भव्य भोग और सात हजार भक्तों के लिए प्रसादी मंदिर में भगवान सांवलिया सेठ को 56 भोग का विशाल प्रसाद चढ़ाया गया। इसके बाद सात हजार से अधिक भक्तों को प्रसादी वितरित की गई। भक्तों की लंबी कतारें लगीं, लेकिन व्यवस्था इतनी सुचारु थी कि किसी को परेशानी नहीं हुई। मंदिर पुजारी ने सभी को चरणामृत देकर आशीर्वाद दिया। प्रसादी वितरण के समय भी विधायक के समर्थकों में उत्साह और गर्व साफ नजर आ रहा था। विधायक बोले—“जनता की आस्था ही मेरी ताकत” इस अवसर पर विधायक चंद्रभानसिंह आक्या ने कहा कि निर्दलीय चुनाव लड़ना उनके लिए एक बड़ा निर्णय था, लेकिन जनता ने उन्हें जिस प्यार और समर्थन से जीत दिलाई, वही उनकी असली ताकत है। उन्होंने बताया कि जीत को दो साल बीत चुके हैं, फिर भी लोग लगातार मन्नतें पूरी कर रहे हैं। इससे उन्हें एहसास होता है कि जनता उन्हें किस सम्मान और विश्वास से देखती है। अब तक 25 हजार लोग कर चुके हैं पैदल यात्रा विधायक आक्या ने बताया कि उनके निर्वाचन क्षेत्र से पिछले दो साल में लगभग 25 हजार लोग सांवलियाजी मंदिर तक पैदल यात्रा कर चुके हैं। यह यात्रा सिर्फ धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि जनता के गहरे भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक बन चुकी है। उन्होंने कहा कि सोमवार को रामेश्वर गुर्जर ने भी अपने मनोकामना को पूरा किया, जो लंबे समय से उनके मन में था लेकिन समय नहीं मिल पा रहा था। उन्होंने कहा—“शायद ठाकुर जी का आदेश अब आया, इसलिए आज ये पावन काम पूरा हुआ।”


