सागर के राहतगढ़ वन परिक्षेत्र में काले हिरण के शिकार मामले में कोर्ट ने तीनों आरोपियों को मंगलवार को 4 दिन की रिमांड पर भेज दिया है। गिरफ्तार आरोपियों में एक डॉक्टर भी शामिल है। अब वन विभाग और एसटीएफ भोपाल की टीम रिमांड के दौरान आरोपियों से सख्ती से पूछताछ करेगी। जांच टीम को शक है कि यह मामला सिर्फ शिकार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार बड़े वन्यजीव व्यापार से जुड़े हो सकते हैं। जांच टीम के अनुसार, रिमांड के दौरान आरोपियों के मोबाइल फोन, लैपटॉप, बैंक खातों और पैसों के लेनदेन से संबंधित दस्तावेजों की डिटेल खंगाली जाएगी। इसके साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि घटना के दिन आरोपी किन-किन लोगों के संपर्क में थे और उनका नेटवर्क कहां तक फैला है। मुंबई मांस भेजने का शक, पुराने लिंक खंगाल रही टीम प्रशिक्षु IFS अधिकारी जयप्रकाश ने बताया कि इस मामले को सिर्फ शिकार की घटना मानकर नहीं, बल्कि वन्यजीव व्यापार से जोड़कर भी जांच की जा रही है। शुरुआती पूछताछ में कुछ ऐसे सुराग मिले हैं, जिससे आशंका है कि आरोपी काले हिरण का मांस मुंबई भेजते थे। वे इस तरह की गतिविधियां बहुत पहले से कर रहे हैं, ऐसी भी संभावना है। पूछताछ में बड़े खुलासे होने की उम्मीद है। 4 दिसंबर की रात जंगल में हुई थी गिरफ्तारी दरअसल, 4 दिसंबर की रात वन विभाग को मुखबिर से सूचना मिली थी कि राहतगढ़ वन परिक्षेत्र की बेरखेड़ी बीट के टेहरा-टेहरी जंगल में संदिग्ध लोग दो कारों में सवार होकर पहुंचे हैं। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम कार्रवाई के लिए रवाना हुई और जंगल के रास्ते पर नाकाबंदी की। टीम के जवान झाड़ियों में छिपकर बैठ गए। रात करीब 3 बजे जब गाड़ियां जंगल से वापस आईं, तो उन्हें घेराबंदी कर पकड़ लिया गया। 10 किलो मांस और रायफल बरामद कार्रवाई में दो कारों में सवार आरोपी डॉक्टर वसीम खान (निवासी मंडी बामौरा, हाल मुकाम भोपाल), ओमकार आदिवासी (निवासी टेहरा टेहरी) और राजू आदिवासी (निवासी सेमरामेढ़ा) को गिरफ्तार किया गया। उनके कब्जे से काले हिरण का 10 किलो मांस, खाल, सागौन की लकड़ी, .22 बोर की राइफल, 15 जिंदा कारतूस और 3 खाली खोखे बरामद हुए थे। आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच की जा रही है।


