ग्वालियर सेंट्रल जेल से पैरोल पर रिहा किए गए 50 से अधिक कैदी अब तक वापस नहीं लौटे हैं। इनमें कई कैदी हत्या, दुष्कर्म, लूट और अन्य गंभीर अपराधों में सजा काट रहे थे। जेल प्रशासन ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए चिंता जताई है। फिलहाल 9 बंदी ऐसे हैं जो पैरोल जंप कर फरार बताए जा रहे हैं। जेल अधीक्षक विदित सरवैया के मुताबिक, कोरोना काल के दौरान जेल मुख्यालय के निर्देश पर संक्रमण के खतरे को देखते हुए बड़ी संख्या में कैदियों को पैरोल पर रिहा किया गया था। इस दौरान गंभीर अपराधों में शामिल बंदियों को भी अस्थायी राहत दी गई, लेकिन कई बंदियों ने इस छूट का दुरुपयोग किया। अधीक्षक ने बताया कि पैरोल की अवधि खत्म होने के बाद भी कई कैदी जेल वापस नहीं आए। उन्हें नोटिस और सूचना भेजी गई, लेकिन इसके बावजूद वे लौटने से बचते रहे। इस साल करीब 700 बंदियों को पैरोल दी गई थी, जिनमें से 20 ने तय समय पर वापसी नहीं की। इनमें से अब भी 7 बंदी फरार हैं। क्या है बंदियों को छोड़ने के नियम और कानून कानून के अनुसार, दो साल से अधिक समय से जेल में बंद विचाराधीन कैदी और सजायाफ्ता दोनों को पैरोल का अधिकार है। एक बंदी साल में तीन बार, यानी हर चार महीने में एक बार, अधिकतम 15 दिन की पैरोल ले सकता है। इसमें 14 दिन की पैरोल अवधि और एक दिन का यात्रा समय शामिल होता है। पैरोल केवल बंदी के अच्छे आचरण और व्यवहार के आधार पर ही दी जाती है। पैरोल से लौटने वाले बंदियों की तारीख और समय पर जेल प्रशासन की नजर इससे पहले सजा काट रहा बंदी गुड्डू उर्फ देवेंद्र यादव हत्या के मामले आजीवन कारावास की सजा काट रहा था। उसे 28 फरवरी को पैरोल पर जेल से छोड़ गया था और 14 मार्च को उसे जेल वापस लौटना था, इसके बावजूद भी वह पैरोल जंप कर फरार हो गया। जिसके अपराध में गुड्डू और उसके जमानतदारों पर जेल प्रशासन की शिकायत पर थाने में मामला दर्ज करवाया गया था और पुलिस उनकी तलाश कर रही है। यह बंदी अभी भी फरार


