भास्कर न्यूज | कोंडागांव पुनर्वास केंद्र में मंगलवार को तीन दिवसीय मछली पालन तकनीकी उन्नयन प्रशिक्षण संपन्न हुआ। जिला प्रशासन और मत्स्य पालन विभाग की इस संयुक्त पहल का उद्देश्य पुनर्वासित व्यक्तियों को सतत आजीविका के नए अवसर प्रदान करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। 06 से 09 दिसंबर तक आयोजित इस प्रशिक्षण में कुल 28 लाभार्थियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को वैज्ञानिक तरीके से मत्स्य पालन करने के विभिन्न चरणों की विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञ योगेश कुमार देवांगन ने मछली पालन से जुड़ी तकनीकी बारीकियों तालाब की तैयारी, गुणवत्तापूर्ण मछली बीज का चयन, उचित संचयन, संतुलित आहार प्रबंधन, रोगों की पहचान और नियंत्रण पर सरल और प्रयोगात्मक मार्गदर्शन दिया। उन्होंने बताया कि यदि आधुनिक तरीके अपनाए जाएं तो मत्स्य पालन ग्रामीण क्षेत्रों में आय का मजबूत साधन बन सकता है। अधिकारियों ने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण से प्राप्त कौशल को व्यवहार में लाने और स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। प्रशिक्षण के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि मत्स्य पालन न केवल आर्थिक आय बढ़ाता है, बल्कि परिवारों को दीर्घकालिक स्थिरता भी प्रदान करता है। कार्यक्रम में मत्स्य पालन विभाग के अधिकारी तथा लाइवलीहुड कॉलेज के पूनेश्वर वर्मा भी उपस्थित रहे। उन्होंने पुनर्वासित व्यक्तियों के लिए ऐसे कौशल आधारित प्रशिक्षणों को नई शुरुआत और सुरक्षित भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।


