कुष्ठ: पुसौर संवेदनशील, पूरी दवा नहीं लेने से कंट्रोल करना हो जाएगा कठिन

भास्कर न्यूज | रायगढ़ कुष्ठ रोग के मामले में जिले का पुसौर ब्लॉक संवेदनशील है, जिले में कुष्ठ की प्रसार दर प्रति एक लाख में 3.31 है यानी एक लाख में 33 लोग कुष्ठ रोग से ग्रसित हैं। डॉक्टरों के अनुसार कुष्ठ की पूरी खुराक लेने से इसे नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन बीच में दवा छोड़ देने से यह रोग घातक हो सकता है, इसके बाद इसे कंट्रोल करना मुश्किल होगा। कुष्ठ रोगियों की पहचान के लिए जिले में विशेष जांच अभियान चलाया जा रहा है। डॉक्टर अनिल जगत के अनुसार कुष्ठ रोग संक्रमित व्यक्ति के नाक और मुंह से निकलने वाली बूंदों (ड्रॉपलेट्स) के माध्यम से फैलता है, जो सांस के ज़रिए दूसरे व्यक्ति के शरीर में प्रवेश करती हैं। इसके संक्रमित कुष्ठ रोगी के साथ लंबे समय तक एक साथ रहने से भी फैलता है, लेकिन कभी कभार किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने या उसे छू भर लेने से यह रोग नहीं फैलता है। कुष्ठ रोग की प्रसार दर प्रति लाख व्यक्तियों में जिले में 3.31 है। यह दर सरकार के मानक दर से अधिक है, सरकार का मानक दर 1 से कम है। पिन चुभाने पर नहीं होता अहसास तो कुष्ठ का संदेह सीएमएचओ डॉ. जगत के अनुसार कुष्ठ को खोजना कठिन होता है क्योंकि लोग इसे छुपाते हैं। लेकिन किसी व्यक्ति के शरीर के किसी अंग में सुन्नपन है, उसे छूने से या पिन चुभाने से पता नहीं चलता यह कुष्ठ हो सकता है, इसी प्रकार उंगलियां टेढ़ी हो रही है, नाक दब रही है या शरीर का कोई अंग गल रहा है तो यह भी कुष्ठ हो सकता है, ऐसी स्थिति में जांच कराना व दवा लेना आवश्यक होता है। जिला मलेरिया एवं कुष्ठ अधिकारी डॉ.टी.जी. कुलवेदी के अनुसार नसों में मोटापन या दर्द, झुनझुनाहट, अथवा कान या चेहरे में सूजन, मोटापन जैसे लक्षण दिखाई दें, तो यह कुष्ठ रोग का संकेत हो सकता है।

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