प्रदेश में सार्वजनिक और कार्य स्थल पर महिला टॉयलेट की कमी के मुद्दे पर मंगलवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश एमएम श्रीवास्तव की खंड पीठ ने सुनवाई के दौरान मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि आज 21वीं सदी में भी टॉयलेट जैसे बेसिक इश्यू पर कोर्ट को दखल देनी पड़ रही है। बैंच ने राज्य और केंद्र सरकार से पूछा कि इस समस्या का आपके पास क्या हल है? कोर्ट ने मामले में जवाब पेश करने के लिए 4 सप्ताह का समय दिया है। महिला टॉयलेट की कमी के मुद्दे को लेकर हाईकोर्ट ने स्वप्रेरित प्रसंज्ञान लिया था। घर के बाहर महिलाएं पानी नहीं पीती हैं
मामले में न्यायमित्र वकील सुप्रिया सक्सेना ने बताया कि प्रदेश में महिला टॉयलेट की कमी को लेकर पिछले महीने हाईकोर्ट ने स्वप्रेरित प्रसंज्ञान लिया था। इसमें कोर्ट ने महिला शौचालय की कमी के चलते महिलाओं की ओर से कम पानी पीने और यूरिन रोकने से होने वाली बीमारियों को लेकर चिंता व्यक्त की थी। अदालत ने कहा था- प्रदेश में महिला शौचालय की कमी है। जहां शौचालय मौजूद है, उनमें साफ-सफाई का अभाव है। ऐसे में सार्वजनिक स्थान, बाजार और घरों में महिलाएं तब तक टॉयलेट नहीं जाती हैं, जब तक उन्हें साफ-सुथरा शौचालय नहीं मिल जाता है। ऐसे में महिलाएं घर लौटने का इंतजार करती है। कोर्ट ने कहा- इस डर से महिलाएं पानी भी नहीं पी पाती कि उन्हें सार्वजनिक स्थानों पर फीमेल टॉयलेट नहीं मिलेगा। मेडिकल साइंस में बताया गया है कि यूरिन रोकने से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। आज महिलाओं की आबादी 50 प्रतिशत है, लेकिन पुरुषों की तुलना में महिलाओं के पास सुविधाओं का अभाव है। राज्य सरकार को दिए थे 31 निर्देश
हाईकोर्ट ने मामले में राज्य सरकार को 31 निर्देश देते हुए कहा था कि प्रदेश के सभी नगर निगम, नगर परिषद और बोर्ड सार्वजनिक स्थानों पर फीमेल टॉयलेट बनाने के लिए एक व्यापक कार्य योजना तैयार करें। इसे लेकर आयुक्त की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया जाएगा। कमेटी में सिटी इंजीनियर, स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास के अधिकारी, इस क्षेत्र में काम करने वाले एनजीओ की महिला प्रतिनिधि सदस्य होंगे। यह कमेटी सार्वजनिक स्थानों, सड़क किनारे और बाजारों में महिला शौचालय के लिए जगह चिह्नित करेगी। इस जगह पर स्थानीय निकायों द्वारा महिला शौचालय का निर्माण करवाया जाएगा। निर्माण के बाद टॉयलेट में सफाई और रखरखाव का जिम्मा स्थानीय निकायों का रहेगा। टॉयलेट में एक महिला अटैंडेंट और महिला सुरक्षा गार्ड भी रखना होगा। समिति के सदस्य समय-समय पर इन टॉयलेट्स का औचक निरीक्षण करेंगे। ये खबर भी पढ़ें…
टॉयलेट की कमी के चलते महिलाएं नहीं पी रहीं पानी:हाई कोर्ट ने कहा-महिलाएं सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही, सार्वजनिक स्थानों पर सुविधा नहीं हाईकोर्ट ने प्रदेश में महिला शौचालय की कमी के चलते महिलाओं द्वारा कम पानी पीने और यूरिन रोकने से होने वाली बीमारियों को लेकर चिंता व्यक्त की है। जस्टिस अनूप ढंड की अदालत ने मीडिया रिपोट्र्स पर स्वप्रेरित प्रसंज्ञान लेते हुए कहा-आज हम 21वीं सदी में पहुंच गए हैं। आज भी महिलाओं की स्थिति को पितृ सत्तात्मक समाज द्वारा परिभाषित किया जा रहा है। (यहां पढ़ें पूरी खबर)


