हजारीबाग जेल से विकास तिवारी ने रची साजिश, दो आरोपी…

मंगलवार को पोस्टमार्टम होना था। तीन डॉक्टरों की टीम बनाई गई थी। शवों को देखने के बाद डॉक्टरों ने बताया कि गोलियां हड्डियों में फंसी हुई हैं। इसके बाद शवों को रिम्स भेज दिया है। अब रांची में पोस्टमार्टम होगा। कई दिनों से दोनों को ठिकाने लगाने की फिराक में था विकास : पुलिस के अनुसार रामगढ़ कोयलांचल में पहले सुशील श्रीवास्तव और भोला पांडेय गिरोह में दुश्मनी थी। भोला पांडेय और सुशील श्रीवास्तव दोनों मारे गए। हजारीबाग जेल में बंद विकास तिवारी पर सुशील श्रीवास्तव की हत्या का आरोप है। भरत और दीपक भी पांडेय गिरोह के लिए काम करते थे। बाद में दोनों गिरोह से अलग हो गए और अपना आपराधिक संगठन खड़ा कर रहे थे। इसकी सूचना विकास तिवारी को थी। उसने जेल से ही साजिश रची और गुर्गों को तैयार किया। इस बीच उसे जानकारी मिल गई थी कि भरत और दीपक गरदा गांव में हैं। इसके बाद रात में दोनों की हत्या कर दी गई। भरत की गाड़ी चलाता था संयोग; पुलिस को अंदेशा, उसी ने सूचना दी : एसपी रीष्मा रमेशन ने सदर एसडीपीओ मणिभूषण प्रसाद के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया है। एसआईटी में सदर, शहर अंचल के इंस्पेक्टर, सतबरवा, रामगढ़, सदर, मनातू, हैदरनगर के थानेदार हंै। टीम ने भरत के मौसेरे भाई संयोग सिंह को हिरासत में लिया है। संयोग ही भरत का गाड़ी चलाता था। दोनों संयोग के बेटे का जन्मदिन मनाने गांव पहुंचे थे। पुलिस संयोग और मारे गए दोनों अपराधियों का फोन खंगाल रही है। माना जा रहा है कि संयोग ने दोनों के आने की सूचना लीक की थी। क्योंकि हत्यारों के पास घर की चाबी भी थी। वे ताला खोलकर अंदर आए थे। भरत और दीपक किस कमरे में सो रहे हैं, इसकी भी पुख्ता जानकारी उनके पास थी। अपराधी सीधा उसी कमरे में गए जहां भारत पांडेय और दीपक साव सो रहे थे। कमरे में घुसने के साथ ही उन्होंने दोनों पर अंधाधुंध गोलियां चलाईं। पुलिस को घटनास्थल से 25 खोखे मिले हैं।

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