स्वच्छता सर्वेक्षण अब तक पेंडिंग:स्कूलों की साफ-सफाई सुधार सकती है बीकानेर की रैंक, रेड स्पॉट पर कटेंगे नंबर

स्वच्छता सर्वेक्षण अक्टूबर 2014 में शुरू किया गया। बीते 10 साल में पहली बार ऐसा हुआ कि 2024 में सर्वेक्षण ही नहीं किया गया। मई 2024 में लोकसभा चुनाव के कारण सर्वेक्षण रोका गया था। अब चुनाव हुए 6 महीने बीत चुके हैं। 2024 बीत गया और 2025 शुरू भी हो गया मगर सर्वेक्षण शुरू नहीं हुआ। नगर निगम को इस बार स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में अच्छे अंक लाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ेगी। पहली बार शहर के स्कूलों में साफ सफाई को भी स्वच्छता सर्वेक्षण में शामिल किया गया है। इस बार स्वच्छता सर्वेक्षण में स्कूलों की सफाई के लिए नंबर निर्धारित किए गए हैं। इस बार सर्वेक्षण के लिए केंद्रीय टीम स्कूलों में भी जाएगी। स्वच्छता सर्वेक्षण 2024 के तहत स्कूल में शौचालय की सफाई, सभी कक्षा में गीले-सूखे कचरे के कूड़ेदान, छात्रों के लिए सेनेटरी नैपकिन और उसे डिस्पोजल के लिए नंबर दिए जाएंगे। यह श्रेणी 150 नंबर की तय की गई है। साथ ही केंद्रीय टीम सर्वेक्षण में यह भी देखेगी की जो सुविधा स्कूलों में उपलब्ध कराई जा रही है उनका छात्र छात्राएं प्रयोग कर रहे हैं या नहीं। वहीं पर्यटन स्थलों पर भी सफाई के लिए भी इस बार नंबर मिलेंगे। साथ ही कार्यालय की दीवारों पर रेड स्पॉट का निरीक्षण करेगी और रेड स्पॉट दिखा तो निर्धारित 60 अंक काटे जाएंगे। स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 ट्रिपल आर (रिफ्यूज, रिड्यूस, और रीसाइकिल) पर आधारित है और इस बार 9500 अंक आधारित है। अभी सर्वे हुआ तो सीवरेज ले डूबेगा अगर इस समय शहर में सर्वेक्षण किया जाता है तो पुरानी सीवरेज के बुरे हालात और अमृत 2 के तहत चल रहा काम बीकानेर की रैंक को ले डूबेगा। हालात ये हैं कि मुख्य रोड तक अमृत 2 के लिए बंद कर दी गई है। सूरसागर के पास ऐसी जगह गड्ढा खोदा गया कि पूरा ट्रैफिक अस्त व्यस्त रहता है। पूरे शहर में सीवरेज ओवर फ्लो होना आम बात है। अमृत-2 में जहां पहले गड्ढे खोदे गए थे उन्हें भी अब तक ठीक नहीं किया गया। शहर में ड्रेनेज सिस्टम अभी तक तैयार नहीं हुआ है। 100 करोड के टेंडर हुए हैं। फर्म सर्वे कर रही है। अमृत-2 का सीवरेज का कार्य चल रहा है। बारिश में जल निकासी चुनौती बनी हुई है। डोर टू डोर कूड़ा उठाने की व्यवस्था भी हर वार्ड में खराब है। टिपर का समय तक स्थायी नहीं रहा। मन आए उस समय टिपर आते हैं। इन सभी के लिए 300 अंक निश्चित है और नंबरों को पाने के लिए भी नगर निगम को काफी मेहनत करनी होगी। इन जगहों पर रहेगी चुनौती 1. नए निर्माण के दौरान निकलने वाले कचरे का निस्तारण हो रहा है या नहीं। बीकानेर में अजीब परंपरा है कि अगर किसी का मकान बन रहा तो उसकी पूरी सामग्री सड़क पर डालकर रास्ता ही बंद कर देते हैं। निगम अब तक इस पर कोई अंकुश नहीं लगा पाया। 2. विवाह स्थल, शिक्षण संस्थान, कार्यालय, होटल और रेस्टोरेंट कचरे से खाद बनाने की मशीन लगा चुके या नहीं इसके 100 अंक तय हैं। बीकानेर नगर निगम इसमें भी फेल है। कचरे से खाद जैसा कोई काम बीकानेर में नहीं हो रहा। 3. इस बार 600 अंकों का सिटीजन फीडबैक होगा। इसमें स्वच्छता चैंपियन और लोकल ब्रांड एंबेसडर शहरवासियों को सर्वेक्षण के बारे में जानकारी देंगे। सिटीजन फीडबैक में सिर्फ एक बार ही बीकानेर ने भूमिका निभाई थी। वरना हमेशा सिटीजन फीडबैक में बीकानेर पिछड़ा ही है। खराब ही रहा है शहर का रिकॉर्ड 2023 के स्वच्छता सर्वेक्षण में 446 शहरों में बीकानेर की 342वीं रैंक आई थी। प्रदेश में 18वीं रैंक थी। 2022 की तुलना में 63 रैंक लुढ़का था बीकानेर नगर निगम। 2020 में बीकानेर की रैंक 179 रैंक थी। 2021 में 239, 2022 में 279 रैक आई थी। यानी 179 से 342 रैंक पर पहुंचना बीकानेर की दुर्दशा को दिखाता है। ये हैं तीन सर्वेक्षण के तीन प्रमुख बिंदू

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