राजस्थान हाईकोर्ट की बार-बार फटकार और सख्त टिप्पणियों के बाद आखिरकार जोधपुर में राजस्थान सिविल सेवा अपीलेट अधिकरण (RCSAT) की पूर्ण पीठ का गठन हो गया है। राज्य सरकार के कार्मिक (क-2) विभाग ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश नंदिनी व्यास का ट्रांसफर कर उन्हें सदस्य (न्यायिक), RCSAT स्थायी पीठ जोधपुर के पद पर पदस्थापित किया है। व्यास ने गुरुवार को अधिकरण की स्थायी पीठ में कार्यभार ग्रहण कर लिया। व्यास इससे पूर्व जयपुर मेट्रोपोलिटन-प्रथम में जिला एवं सत्र न्यायाधीश पद पर कार्यरत थीं। उनके कार्यग्रहण के साथ ही जोधपुर, उदयपुर, बीकानेर, पाली व बांसवाड़ा संभाग के प्रकरणों की नियमित अपील सुनवाई अब जोधपुर पीठ में हो सकेगी। हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद कदम यह नियुक्ति राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ द्वारा बार-बार नाराजगी जताने और सख्त फटकार के बाद हुई है। जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस अनुरूप सिंघी की खंडपीठ ने 7 नवंबर को दिए अपने आदेश में कहा था कि अवमानना कार्रवाई अधिकारियों के जवाबी स्पष्टीकरण से तय की जाएगी। खंडपीठ ने कहा था कि कोर्ट के 19 जुलाई 2022 को पारित आदेश की पालना में जोधपुर में अधिकरण की स्थायी पीठ वास्तविक रूप से शुरू नहीं करने तथा इसके बाद के विभिन्न निर्देशों की पालना नहीं कर आदेशों की अनदेखी करना बेहद गंभीर है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि बार-बार निर्देश देने के बावजूद सीमित अनुपालन किया जाना कोर्ट को विशेष रूप से दुखी करने वाला है। राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन की ओर से दायर जनहित याचिका पर बहस करते हुए एडवोकेट अनिल कुमार भंडारी ने कहा था कि जोधपुर क्षेत्र के राज्य कर्मचारियों के लगभग 7 हजार प्रकरण लंबित होने से जोधपुर में अधिकरण की स्थायी पीठ सदस्यों और स्टाफ नियुक्ति तथा सभी संसाधन सहित गठित की जाए। एक साल में सिर्फ 64 दिन कार्य राज्य सरकार ने 4 मई 2023 को जोधपुर में स्थायी पीठ की अधिसूचना जारी की थी और कर्मचारियों की भी नियुक्ति कर दी थी। अधिकरण ने 12 सितंबर 2023 को जोधपुर का क्षेत्राधिकार तय करते हुए जोधपुर, उदयपुर, बीकानेर, पाली और बांसवाड़ा संभाग के सभी जिलों की लंबित तथा नई पत्रावलियों की सुनवाई जोधपुर में करने का आदेश जारी किया था। 7 अक्टूबर 2023 को जोधपुर पीठ के लिए गैर न्यायिक सदस्य असलम मेहर की नियुक्ति भी कर दी गई थी। स्टाफ और गैर न्यायिक सदस्य की नियुक्ति के बावजूद अधिकरण की स्थायी पीठ जोधपुर में वास्तविक रूप से शुरू नहीं होने पर खंडपीठ ने 29 जनवरी को राज्य सरकार को निर्देश दिए थे कि जोधपुर में अधिकरण की स्थायी पीठ का वास्तविक रूप से क्रियान्वयन किया जाए। जब कोर्ट ने राज्य सरकार और अधिकरण अध्यक्ष से सुनवाई के दिनों की जानकारी मांगी और सरकार ने जोधपुर में अधिकरण की एक साल की सुनवाई के आंकड़े पेश किए, तो कोर्ट ने इस बात पर हैरानी और आश्चर्य जताया कि पिछले एक साल में अधिकरण ने केवल 64 दिन कार्य किया। “इच्छाशक्ति का पूर्ण अभाव” खंडपीठ के आदेश पर 10 नवंबर को प्रमुख विधि सचिव बिजेंद्र कुमार जैन और अधिकरण अध्यक्ष विकेश सीताराम भाले कोर्ट में पेश हुए थे। खंडपीठ ने सरकार के स्पष्टीकरण से पूर्णतया असंतोष जताते हुए कहा था कि स्थाई पीठ को चालू करने के लिए राज्य सरकार में कोई इच्छाशक्ति ही नहीं दिख रही है। कोर्ट ने कहा था कि प्रतिवादियों की ओर से जोधपुर में राजस्थान सिविल सेवा अपीलेट अधिकरण की विधिवत अधिसूचित स्थायी पीठ के रूप में नागरिकों के मूल्यवान वैधानिक अधिकार को प्रभावी और क्रियाशील बनाने के लिए इच्छाशक्ति का पूर्ण अभाव प्रतीत होता है। खंडपीठ ने अंतिम अवसर के रूप में प्रतिवादियों को निर्देश दिया था कि वे तुरंत सभी जरूरी कदम उठाएं, ताकि जोधपुर में राजस्थान सिविल सेवा अपीलेट अधिकरण की स्थायी पीठ बिना किसी और विलंब के कार्यशील हो जाए। अब पहले महीने में सिर्फ 8 दिन नहीं, पूरे माह सुनवाई पूर्व में पूर्ण पीठ उपलब्ध न होने से जयपुर पीठ से अतिरिक्त सदस्य को जोधपुर भेजा जाता था, जिससे प्रति माह केवल आठ दिन ही सुनवाई हो पाती थी। अब नंदिनी व्यास के सदस्य (न्यायिक) के रूप में पदस्थापित होने से जोधपुर में पूर्ण पीठ का गठन हो गया है, जिससे नियमित तौर पर प्रकरणों की सुनवाई संभव होगी और अपीलार्थियों को समय पर न्याय प्राप्त होगा।


